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यूजर्स जो अपने स्मार्टफोन (smartphone hazards) को टाइपराइटर बनाना चाहते हैं, उनके लिए एक अच्छी खबर है। युवा पीढ़ी के बच्चों की बदौलत मोबाइल हैंडसेट्स पर टाइपिंग स्पीड अब फिजिकल कीबोर्ड्स के बराबर होती जा रही है। 37 हजार यूजर्स पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, मोबाइल डिवाइस और फिजिकल कीबोर्ड्स के बीच टाइपिंग स्पीड में अंतर कम हो रहा है और 10 से 19 साल के बच्चे अपने माता-पिता की पीढ़ी की तुलना में लगभग 10 शब्द-प्रति मिनट तेजी से टाइप कर सकते हैं।
ऑल्टो यूनिवर्सिटी (फिनलैंड), कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और ईटीएच ज्यूरिख के शोधकर्ताओं ने फोन और कंप्यूटर दोनों पर ही हजारों यूजर्स की टाइपिंग गति का विश्लेषण किया। यदि आप मोबाइल पर तेजी से टाइप करना चाहते हैं तो शोधकर्ता इसके लिए दो अंगूठे का प्रयोग करने और शब्दों के ऑटो-सुधार को एनेबल करने की सलाह देते हैं।
ईटीएच ज्यूरिख के शोधकर्ता और सह-लेखकों में से एक अन्ना फीट ने कहा, “हम यह देखकर चकित हुए कि दो अंगूठों की मदद से यूजर्स एक मिनट में औसतन 38 शब्द लिख लेते हैं। यह फिजिकल कीबोर्ड्स के बड़े पैमाने पर अध्ययन में हमने जो टाइपिंग स्पीड देखी, उससे केवल 25 प्रतिशत धीमी है।”
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जबकि फिजिकल कीबोर्ड पर कुछ लोग 100 शब्द प्रति मिनट तक लिख लेते हैं। लेकिन तुलना करने पर ऐसा कर पाने में कुछ लोग ही सक्षम होते हैं। अधिकतर लोग 35 से 65 शब्द प्रति मिनट तक लिख पाते हैं। शोध के लेखकों का अनुमान है कि जैसे-जैसे लोग फिजिकल कीबोर्ड के साथ कम कुशल होते जाएंगे और कीबोर्ड के लिए स्मार्ट तरीकों में और सुधार होगा (जैसे कि ऑटो-करेक्शन और टच मॉडल), तो कुछ समय बाद इस अंतर के खत्म होने की संभावनाएं हैं।
आजकल बच्चे अपने पेरेंट्स से भी ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल (smartphone hazards) करते हैं। सारा दिन फोन पर लगे रहने से ना सिर्फ उनकी आंखों की दृष्टि कमजोर हो जाती है, बल्कि सारा दिन गेम खेलना, दोस्तों से बातें करने से उगलियों की मांसपेशियों और हड्डियों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। मोबाइल फोन से बच्चों के शरीर पर ये भी दुष्प्रभाव हो सकते हैं-
नींद पैटर्न में परिवर्तन।
सिर दर्द और आंखों में दर्द रहना।
सीखने और स्मृति पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
सुनने में आ सकती है समस्या।
व्यवहारिक परिवर्तन भी हो सकता है।
फोन को शरीर से दूर रख कर करना चाहिए यूज।
फोन को जब आप कुछ फीट की दूरी पर ही रखते हैं, तो विकिरण की तीव्रता काफी हद तक कम हो जाती है।
बात भी जब वो अपने दोस्तों से करें या गानें सुनें, तो हेडसेट या इयरफोन लगाने को कहें।
किशोरों को हाथ, जेब या बेल्ट पाउच में मोबाइल फोन नहीं रखना चाहिए, इसकी बजाय फोन को बैकपैक, स्कूल बैग या पर्स में रखें।
बिस्तर पर फोन रखकर सोने से मना करें।
इनपुट: (आइएएनएस हिंदी)