
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Published : June 28, 2021 10:35 AM IST
बच्चों को यह बताएं कि खांसते वक्त या छींकते वक्त अपना मुंह कवर रखें।
हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि क्योंकि कॉमन फ्लू, इन्फ्लुएंजा (Common Flu and Influenza) और कोविड-19 के लक्षण आपस में ओवरलैप कर रहे हैं इसलिए मानसून आने से पहले छोटे बच्चों को इन्फ्लुएंजा का टीका (Influenza vaccination to Children) लगाना बहुत जरूरी है। इससे बच्चे न सिर्फ कॉमन फ्लू से भी लड़ पाएंगे बल्कि कोरोना से सुरक्षित रहेंगे। बहुत सारे पेरेंट्स का सवाल है कि इन्फ्लुएंजा या फ्लू क्या हैं और ये कॉमन कोल्ड से कैसे अलग है? बच्चों को फ्लू से बचाने की क्या जरूरत है? तो आपको बता दें कि छोटे बच्चों में नाक बहना और खांसी होना बहुत कॉमन है। लेकिन जब इसके साथ बुखार, नाक सूख जाना और शरीर का गर्म होना जैसे लक्षण दिखते तो ये इन्फ्लुएंजा या फ्लू के लक्षण (Influenza Symptoms In Children) हो सकते हैं। डॉक्टर्स कहते हैं कि बच्चों में फ्लू बेहद खतरनाक हो सकता है और ये बच्चों के फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है। रिसर्च बताती हैं कि कुछ बच्चे फ्लू से एक हफ्ते के अंदर सही हो जाते हैं तो कुछ बच्चों की हालत इतनी बिगड़ जाती है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है और निमोनिया होने के साथ ही जान का जोखिम भी रहता है। स्टडीज बताती हैं कि भारत में हर साल फ्लू के कारण 5 साल से छोटे करीब 1 लाख बच्चे अस्पताल में भर्ती होते हैं।
वैसे तो इन्फ्लुएंजा या फ्लू की चपेट में कोई भी व्यक्ति आ सकता है लेकिन 6 महीने से लेकर 5 साल की उम्र तक के बच्चे, गर्भवती, 65 साल की उम्र से अधिक के लोग, हेल्थकेयर वर्कर्स और डायबिटीज, अस्थमा, कैंसर और अन्य खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इन्फ्लुएंजा या फ्लू की चपेट में आने का ज्यादा खतरा रहता है। क्योंकि छोटे बच्चों की इम्युनिटी बहुत कमजोर होती है इसलिए वो इन्फ्लुएंजा की चपेट में जल्दी आ जाते हैं और रिकवर होने में उन्हें काफी समय लगता है। लेकिन अगर बच्चों को मानसून से पहले ही टीका लग जाएगा तो वो संक्रमण से बच सकते हैं। क्योंकि अब डेल्टा प्लस वेरिएंट भी आ चुका है इसलिए जरूरी है कि बच्चों को सुरक्षित रखा जाए। अगर बच्चे फ्लू की चपेट में आते हैं तो उनके डेल्टा प्लस वेरिएंट की चपेट में आने का भी खतरा रहेगा।