New Study: छोटे बच्चों को भी हो सकता है गंभीर COVID संक्रमण, एक्सपर्ट्स ने लक्षण व इलाज के बारे में दी ये जानकारी

Covid 19 in children: अधिकतर लोग समझते हैं कि छोटे बच्चों में कोविड 19 के संक्रमण गंभीर नहीं होते हैं या बच्चे बहुत ही कम इसके संक्रमित हो पाते है, लेकिन हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया कि छोटे बच्चों में भी कोरोना संक्रमण के गंभीर लक्षण हो सकते हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 3, 2022 1:12 PM IST

ज्यादातर लोगों ने यह धारणा बनाई हुई है कि बच्चों को कोविड 19 संक्रमण (Covid 19 in Children) नहीं होता है या उन्हें यह संक्रमण होने का खतरा कम होता है। लोग अक्सर इस तथ्य को भूल जाते हैं, कि कुछ वयस्कों के स्वास्थ्य के लिए कोविड 19 इतना खतरनाक हो सकता है, तो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए यह कम खतरनाक कैसे हो सकता है। हालांकि, हाल ही में इस पर एक अध्ययन में ऐसे पाथवे (Pathways) की खोज की गई, जो बच्चों में गंभीर कोविड 19 संक्रमण के दौरान सक्रिय हो जाते हैं। इसकी मदद से बच्चों में स्थितियों के गंभीर होने से पहले ही उसका निदान व इलाज किया जा सकता है। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में रहने वाले लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला है। कोरोना की एक के बाद एक लहर आ रही हैं, अन्य देशों की स्थिति को देखते हुए भारत में भी कोरोना की चौथी लहर (Covid 19 4th wave) आने का खतरा बढ़ गया है। इसी बीच इस अध्ययन ने कोविड 19 संक्रमण और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों में लक्षण

अगर कोरोना संक्रमण के कारण बच्चों को हो रहे लक्षणों की बात करें, तो अध्ययनकर्ताओं के अनुसार बच्चों को बुखार, पेट में दर्द, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते होना और आंख आना आदि लक्षण होते हैं। जिन बच्चों में कोविड 19 का संक्रमण गंभीर हो जाता है, उनमें कावासाकी रोग और टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं।

बच्चों में कोविड 19 होने का मुख्य कारण

शोधकर्ताओं के अनुसार छोटे बच्चों में कोविड 19 संक्रमण शुरू होने का मुख्य कारण ब्लड क्लॉटिंग (रक्त के थक्के बनने की सामान्य प्रक्रिया) होती है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के प्रोटीन वायरस के प्रति किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं। अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 20 स्वस्थ बच्चों और 33 गंभीर रूप से संक्रमित बच्चों से सैंपल लिए गए। इन सैंपलों पर किए गए अध्ययन में पाया कि क्रमश: 85 प्रोटीन मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम और 52 प्रोटीन एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के पाए गए।

रिसर्च से क्या मदद मिलती है।

ऑस्ट्रेलिया में मर्डोक चिल्ड्रन रिसर्च इंस्टीट्यूट (MCRI) के प्रोफेसर वेरा इग्नजाटोविक ने कहा कि अध्ययन के परिणामों से प्राप्त जानकारी से यह पता चलता है कि बच्चों को कोविड 19 के लक्षणों की समय पर जांच किए जाने पर स्थिति को गंभीर होने से पहले ही उसका पता लगाने व इलाज करने में मदद मिल सकती है।

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