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फरवरी से अप्रैल के बीच जन्मे बच्चों को अस्थमा होने का रहता है खतरा

अध्ययन में यह भी देखा गया कि मांएं अगर फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीने में गर्भवती हों तो गर्भस्थ शिशु का प्रतिरोधक तंत्र फ्लू के साथ ही अस्थमा जैसे श्वास रोगों से बचाव में अधिक ताकतवर बन जाता है।

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Written By: Editorial Team | Published : September 18, 2018 3:45 PM IST

क्या आपका जन्म मार्च महीने में हुआ है? अगर हां, तो आपको अस्थमा सहित अन्य सांस से संबंधित रोगों के खतरे के प्रति ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया स्थित ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के हालिया अध्ययन में यह सलाह दी गई है। फरवरी और अप्रैल माह में जन्मे लोगों को भी सांस रोगों से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी गई है।

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, फरवरी से अप्रैल के बीच की अवधि पराग कणों के फैलाव के लिए जानी जाती है। ऐसे में इन तीन महीनों में जन्में बच्चों के आगे चलकर अस्थमा सहित अन्य श्वास रोगों के शिकार होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। ये बच्चे जल्द ही फ्लू की चपेट में भी आ जाते हैं। अध्ययन में यह भी देखा गया कि मांएं अगर फरवरी, मार्च और अप्रैल के महीने में गर्भवती हों तो गर्भस्थ शिशु का प्रतिरोधक तंत्र फ्लू के साथ ही अस्थमा जैसे श्वास रोगों से बचाव में अधिक ताकतवर बन जाता है।

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दरअसल, ऐसे बच्चों के खून में ‘इम्युनोग्लोब्युलिन’ नाम का एंटीबॉडी अधिक मात्रा में उत्पादित हो पाता है। यह कीटाणुओं, जीवाणुओं और वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक कोशिकाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए जाना जाता है। मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर बिरकास एर्बन की मानें तो जन्म के शुरुआती महीनों में परागकण के संपर्क में आने से फ्लू और श्वास रोगों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ना लाजिमी है। लेकिन अगर इस अवधि में बच्चा मां की कोख में पल रहा हो तो उसका प्रतिरोधक तंत्र मजबूत होता है। अध्ययन के नतीजे ‘जर्नल एन्वायरमेंटल इंटरनेशनल’ के हालिया अंक में प्रकाशित किए गए हैं।