Advertisement

बच्‍चों में भी बढ़ रहा है कैंसर का जोखिम, ऐसे पहचानें लक्षण

समय पर पता न लग पाने के कारण सही समय पर उपचार नहीं ले पाते अधिकांश पीडि़त बच्‍चे।

Written By Yogita Yadav
Published : October 23, 2018 12:03 PM IST

समय पर पता न लग पाने के कारण सही समय पर उपचार नहीं ले पाते अधिकांश पीडि़त बच्‍चे। © Shutterstock

आबादी के आधार पर पर्याप्त आंकड़े नहीं हो पाने के कारण भारत में इस तरह के मामलों का पूरी तरह अनुमान लगाना संभव नहीं है। हालांकि,  बताया जाता है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों में कैंसर के लगभग 40 से 50 हजार नए मामले हर साल सामने आते हैं। इनमें से बहुत से मामले डायग्नोस नहीं हो पाते। बेहतर स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच नहीं होना या प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य सेवा कर्मियों द्वारा बच्चों में कैंसर के लक्षण की पहचान न होने की वजह से इस बीमारी का समय पर पता नहीं लग पाता है।

यह भी पढ़ें - युवतियों में कैंसर की गांठ का पता लगाने में ज्‍यादा कारगर है थ्रीडी मैमोग्राफी

Advertisement

 बच्चों में कैंसर के लक्षण

  • पीलापन और रक्तस्राव (जैसे चकत्ते, बेवजह चोट के निशान या मुंह या नाक से खून)
  • Advertisement

  • हड्डियों में दर्द।
  • किसी खास हिस्से में  दर्द  होता और दर्द  के कारण बच्चा अक्सर रात को जाग जाता है।
  • बच्चा जो अचानक लंगड़ाने लगे या वजन उठाने में परेशानी हो या अचानक चलना छोड़ दे।
  • बच्चे में पीठ दर्द का हमेशा ध्यान रखें।
  • टीबी से संबंधित ऐसी गांठें जो इलाज के छह हफ्ते बाद भी बेअसर रहें।
  • अचानक उभरने वाले न्यूरो संबंधी लक्षण।
  • दो हफ्ते से ज्यादा समय से सिर दर्द।
  • सुबह-सुबह उल्टी होना।
  • चलने में लड़खड़ाहट।
  • अचानक चर्बी चढ़ना. विशेषरूप से पेट, सिर, गर्दन और हाथ-पैर पर।
  • अकारण लगातार बुखार, उदासी और वजन गिरना।

यह भी पढ़ें - आनुवांशिक भी हो सकती है एडीएचडी की समस्‍या, जानें इसके लक्षण और समाधान

सजगता है जरूरी

सभी विकासशील देशों की तरह हमारे देश में भी देरी से स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने, बीमारी को पकड़ने में देरी और उचित इलाज के लायक केंद्रों तक रेफर करने की सुस्त प्रक्रिया से इलाज की दर में कमी आती है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इलाज का सर्वश्रेष्ठ मौका, पहला मौका ही होता है। पर्याप्त देखभाल के बाद भी अनावश्यक देरी, गलत परीक्षण, अधूरी सर्जरी या अपर्याप्त कीमोथेरेपी से इलाज पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए बेहतर है कि उपरोक्‍त में से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर समय रहते ही परीक्षण करवाएं।

About the Author

... Read More