छग : एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म होने से 5 साल की मासूम की मौत

निमोनिया से पीडि़त बुलबुल को बीजापुर से जगदलपुर अस्‍पताल किया गया था रेफर ।

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Written By: Editorial Team | Published : August 28, 2018 10:52 AM IST

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एक बार फिर  से स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। एंबुलेंस में लगे लाइफ सपोर्ट सिस्टम का ऑक्सीजन खत्म हो जाने से नेशनल हाईवे पर 5 साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई। इससे पहले, एंबुलेंस मुहैया न कराए जाने पर एक वृद्ध महिला के शव को नेशनल हाईवे से खटिया पर ढोकर ले जाए जाने का मामला सामने आया था।

ये था मामला

माटवाड़ा आश्रम में पढ़ रही पहली कक्षा की छात्रा बुलबुल कुड़ियम कुछ दिनों से निमोनिया से पीड़ित थी। उसका इलाज बीजापुर जिला अस्पताल में चल रहा था। हालत ज्यादा बिगड़ने पर सोमवार को अपराह्न् 3 बजे एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम के साथ बुलबुल को जगदलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन जगदलपुर पहुंचने से पहले ही नेशनल हाईवे क्रमांक 63 में तोकापाल के पास सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म हो जाने से बुलबुल की मौत हो गई। परिजनों ने बुलबुल की मौत के लिए स्वस्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराया है।

bulubul

बुलबुल के पिता चमरू कुड़ियम ने बताया, माटवाड़ा बालिका आश्रम में बीमार बुलबुल को पिता अपने साथ तोयनार ले आए और यहीं इलाज कराते रहे। सेहत ज्यादा खराब होती देख मोटरसाइकिल की मदद से उसे बीजापुर जिला अस्पताल लाया गया, जहां इलाज शुरू किया गया, लेकिन बीमार बुलबुल की हालत सुधरने की बजाय ज्यादा खराब होने लगी थी। रविवार 3 बजे गंभीर हालत में बुलबुल को एंबुलेंस से ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम में महज एक वाहन चालक के भरोसे परिजनों को डिमरापाल मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना कर दिया।

नहीं मिली मदद

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही बस्तर जिले के तोकापाल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते ही उजागर हो गई, जब बुलबुल को सांसों के लिए लगाए गए सिलेंडर में ऑक्सीजन गैस खत्म हो गई। एंबुलेंस के वाहन चालक ने नजदीकी स्वस्थ्य केंद्र (तोकापाल) में मदद भी मांगी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।

हॉस्पिटल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने जिम्मेदार अधिकारियों के नहीं होने का हवाला देकर ऑक्सीजन सिलेंडर देने से मना कर दिया। एंबुलेंस चालक ने मासूम बुलबुल और उसके परिजनों के साथ मेडिकल कॉलेज जाने का निर्णय लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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तो बच जाती जान

मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर चिकित्सकों ने मासूम बुलबुल की नब्ज टटोलकर उसके मृत होने की पुष्टि की। चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि तकरीबन आधे घंटे पहले ही बुलबुल की सांस थम चुकी है। अगर उसे ऑक्सीजन का सहारा मिलता रहता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।

इस घटना पर बीजापुर के सीएमएचओ बी.आर. पुजारी ने कहा, "घटना की जानकारी मिली है। मासूम की मौत के कारण की जांच की जाएगी।"

खराब हैं हालात

लापरवाही का आलम यह है कि गंभीर मरीज को भी बिना तकनीशियन के एंबुलेंस में भेजा जाता है। संबंधित डॉक्टर यह जांच भी नहीं करते कि सिलेंडर में पर्याप्त ऑक्सीजन है या नहीं। स्वास्थ्य विभाग में जब तक गैरजिम्मेदार, लापरवाह अधिकारी रहेंगे, न जाने कितने मासूम भ्रष्टतंत्र की भेंट चढ़ते रहेंगे।

सालभर पहले उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के गृहनगर गोरखपुर के एक सरकारी अस्पताल में पैसे बकाया होने के कारण ठेकेदार कंपनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी थी, जिस कारण लगभग 60 मासूमों की मौत हो गई थी। उसके बाद तथ्य छुपाने की पुरजोर कोशिश ऊपरी स्तर पर की जाने लगी। उसी दौरान उत्तर प्रदेश पहुंचे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था, "इतने बड़े देश में ऐसी छोटी-मोटी घटनाएं होती रहती हैं।" इससे पता चलता है कि सत्ता शोहरत, ऐशो-आराम तो देती है, लेकिन किसी-किसी से संवेदना छीन लेती है। उन्हें हमारी, हमारे मासूमों की परवाह नहीं, लेकिन वे अपेक्षा रखते हैं कि हर चुनाव में हम उन पर मेहरबानी करते रहें।

स्रोत : IANS Hindi.

चित्रस्रोत : IANS Hindi/ Shutterstock.

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