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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 11, 2022 10:38 AM IST
कोविड के खिलाफ कितनी है शरीर की इम्यूनिटी अब टेस्ट के जरिए चलेगा पता, अमेरिका ने तैयार की टेस्ट किट
Immunity Test Kit in hindi : अमेरिका में शोधकर्ताओं ने एक ऐसा टेस्ट विकसित किया है, जिसकी मदद से आप बड़ी ही आसानी से लोगों में इम्यूनिटी से मिलने वाली सुरक्षा का स्तर पता लगाया जा सकता है। इस टेस्ट को करना बहुत ही आसान है और इसकी मदद से ये भी पता लगाया जा सकता है कि ये इम्यूनिटी कोविड के खिलाफ कितनी प्रभावी है। इसके अलावा ये सुरक्षा वैक्सीन से मिल रही है, या इंफेक्शन से या फिर इन दोनों के मिश्रण से इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकार के टेस्ट तक आसान पहुंच की मदद से लोगों में ये पता लगाने में मदद मिलेगी कि उन्हें कोविड इंफेक्शन के खिलाफ किस प्रकार के उपाय करने चाहिए। जैसे कि उन्हें अतिरिक्त बूस्टर शॉटलेने की जरूरत है भी या फिर नहीं।
जर्नल सेल रिपोर्ट मेथड्स में प्रकाशित निष्कर्षों में ये कहा गया है कि ये टेस्ट एंटीबॉडी को न्यूट्रालाइज करने के लेवल का पता लगा सकता है। ये एंटीबॉडी वायरस से कोशिकाओं को बचाने का काम करती हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, एक ब्लड सैंपल में कोरोनावायरस को निशाना बनाने वाली एंटीबॉडी का टेस्ट किया गया था।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के कोच इंस्टीट्यूट फॉर इंटीग्रेटिव कैंसर रिसर्च के वैज्ञानिक होजुन ली का कहना है कि आम आबादी के बीच कई लोग ऐसे हैं, जो ये जानना चाहते हैं कि वो कितनी अच्छी तरह से सुरक्षित हैं।
ली ने कहा कि लेकिन मुझे लगता है कि ये टेस्ट हर एक व्यक्ति के लिए जीवन में एक बड़ा अंतर ला सकता है, जो कि कीमोथेरेपी ले रहा है या फिर वे लोग जो रूमेटॉलॉजिक विकार या फिर ऑटोइम्यून डिजीज के लिए इम्युनोसपरेसिव दवाओं पर हैं। इसके अलावा बुजुर्ग लोगों और जिनका इम्यून रिस्पॉन्स अच्छा नहीं है उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ लोगों को जल्द ही बूस्टर डोज लगवाने की जरूरत पड़ सकती है या फिर उन्हें पर्याप्त सुरक्षा के लिए अधिक डोज की भी जरूरत पड़ सकती है।
ये टेस्ट इस तरह डिजाइन किया गया है, जो अलग-अलग वायरल स्पाइक प्रोटीन को पकड़ सकता है। बता दें कि स्पाइक प्रोटीन वायरस को शरीर में प्रवेश करने के साथ-साथ कोशिकाओं को संक्रमित बनाने में मदद करता है। इस टेस्ट की मदद से आपको मौजूदा या फिर भविष्य में कोरोनावायरस के वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षा के स्तर को जांचने में मदद मिलेगी।
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक पर एक पेटेंट फाइल कर दिया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही एक डायगोनिस्टिक कंपनी इस टेस्ट का निर्माण कर सकती है। हालांकि अभी ये टेस्ट अमेरिका के फूड एंड ड्रम एडमिनस्ट्रेश के पास मंजूरी के लिए गया हुआ है।