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महिलाओं का जीवन ढेर सारी स्वास्थ्य चुनौतियों से भरा होता है, जिसमें प्रेगनेंसी से लेकर मासिक धर्म, मीनोपॉज और तमाम तरह के कैंसर का खतरा प्रमुख माना जाता है। एक डेटा के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट और लिप और ओरल कैविटी कैंसर के बाद भारत की महिलाओं में पाया जाने वाला कैंसर का तीसरा सबसे आम रूप है। डेटा के मुताबिक, भारत में हर साल सर्वाइकल कैंसर के लगभग 1,23,907 मामलों का पता चलता है, जिसमें से 77,348 मृत्यु भी शामिल है। भारत में सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने के लिए तमाम योजनाएं चालू हैं ठीक पोलियो की तरह। यूं तो सर्वाइकल कैंसर से बचाव 100 फीसदी है लेकिन उसके लिए समय पर सर्वाइकल कैंसर का पता, टीकाकरण और स्क्रीनिंग बहुत ही जरूरी है।
वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशयालिटी हॉस्पिटल और कैंसर केयर इंस्टीट्यूट में गायना सर्जिक्ल ओंकोलॉजी की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. श्वास्ति बताती हैं कि लगभग 99.9% सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होते हैं। लगातार एचपीवी संक्रमण के बाद एक महिला को सर्वाइकल कैंसर विकसितहोने में लगभग 15-18 साल लगते हैं। भारत में यौन प्रथा और कई लोगों के साथ यौन संबंध एचपीवी संक्रमण में वृद्धि का सबसे प्रमुख कारण है।
वर्तमान में, भारत में 9 से 26 वर्ष की आयु की लड़कियों को HPV वैक्सीन दी जाती है। एचपीवी वैक्सीन से किसी भी महिला को इस वायरस के संपर्क में आने से 70% तक की सुरक्षा प्राप्त होती है। एचपीवी संक्रमण को रोकने के लिए किशोरों को वैक्सीन लगाने की जरूरत है ताकि उन्हें पेनाइल, एनल, ऑरोफरीन्जियल कैंसर और अन्य प्रकार के एचपीवी से संबंधित कैंसर के मामलोंमें कम किया जा सके। मौजूदा वक्त में एचपीवी वैक्सीन की दो डोज 15 वर्ष से कम आयु में दी जाती है, जिसमें करीब 6 महीने का अंतर होता है। इसके अलावा तीन खुराक 15 वर्ष की आयु के बाद 0, 2 ,6 महीने के अंतराल पर दी जाती है।
डॉ. श्वास्ति ने बताया कि पिछले एक दशक में एचपीवी वैक्सीनेशन और स्क्रीनिंग के प्रति लोगों में अधिक जागरूकता देखने को मिली है। पहले के मुकाबले पारंपरिक पैप स्मीयर की जगह अब लिक्विड बेस्ड सर्वाइकल साइटोलॉजी और एचपीवी डीएनए हाई रिस्क हाइब्रिड कैप्चर टेस्टिंग का यूज किया जाता है। वास्तव में, अब सर्वाइकल कैंसर के लिए इंडेक्स स्क्रीनिंग टेस्ट के रूप में एचपीवी टेस्ट की सलाह दी जाने लगी है। एचपीवी टेस्टिंग 25 साल की उम्र में और लिक्विड साइटोलॉजी 21 साल की उम्र से शुरू कर देनी चाहिए। सामान्य परिणाम आने पर 65 वर्ष की आयु तक प्रत्येक 5 वर्ष में को टेस्टिंग की जाती है।
सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए एडवांस तकनीक की जरूरत है और WHO ने भी सर्वाइकल कैंसर को कंट्रोल करने के लिए इन जरूरी बातों पर ध्यान देने को कहा हैः
1-वैक्सीनेशन : 90% लड़कियों को 15 साल की उम्र तक पूरी तरह से एचपीवी वैक्सीन लगाने की जरूरत है।
2-स्क्रीनिंग: 35 वर्ष की आयु तक और फिर 45 वर्ष की आयु तक जांच की जरूरत।
3-उपचार: कैंसर से पूर्व इलाज वाली 90% महिलाओं और कैंसर से पीड़ित 90% महिलाओं में कैंसर को कंट्रोल किया जा सकता है।