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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 3, 2022 2:44 PM IST
मंकीपॉक्स पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों को लगेगी वैक्सीन! केंद्रीय मंत्री ने बताया जल्द शुरू होगा अभियान
केंद्र सरकार ने मंकीपॉक्स वायरस के पॉजिटिव लोगों के करीबी सपंर्क में आए लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि फिलहाल किसी विशेष समूह के लोगों यानी की एक विशेष आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाने की कोई विशेष योजना नहीं है।
दरअसल ये फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा राज्यसभा में एक बयान के बाद आया है। स्वास्थ्य मंत्री ने राज्यसभा में कहा था कि इस वायरस के अभी तक भारत में 8 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं, जिसमें 5 केरल और 3 दिल्ली के हैं। इस बाबत सरकार ने सख्त स्क्रीनिंग और कॉन्टेक्ट ट्रेकिंग शुरू करने का फैसला किया है।
मंत्री का कहना है कि ये बीमारी नई नहीं है और इससे घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया का कहना है कि इंडियन काउंसिव ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने मंकीपॉक्स वायरस स्ट्रेन को अलग कर दिया है, जिसके लिए वैक्सीन और डायग्नोस्टिक किट बनाने का काम चल रहा है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंकीपॉक्स के लिए वैक्सीनेशन की सिफारिश नहीं की है।
पुणे स्थित आईसीएमआर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की मैक्सिमम कंटेनमेंट लैबोरेटरी की डॉ. प्रज्ञा यादव का कहना है कि भारत में फिलहाल स्मॉलपॉक्स वैक्सीन नहीं है। मंकीपॉक्स के लिए वैक्सीन की उपलब्धता के सवाल पर दक्षिण पूर्व एशिया प्रांत के विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाव सिंह का कहना है कि हमारे पास क्या-क्या चीजें उपलब्ध हैं और ज्यादा प्रभाव के लिए इन वैक्सीन को कैसे यूज किया जा सकता है इसका पता लगाने में थोड़ा वक्त लगेगा।
डॉ. सिंह का कहना है कि मंकीपॉक्स के लिए एक वैक्सीन है, जिसे फिलहाल कुछ देश ने मंजूरी प्रदान की हुई है लेकिन इसकी आपूर्ति सीमित है। कुछ देशों ने स्मॉलपॉक्स वैक्सीन से बने उप्ताद होल्ड पर हैं, जिन्हें राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक प्रयोग करने पर विचार चल रहा है।
उन्होंने कहा कि ये उत्पाद सीमित मात्रा में उपलब्ध है और ये देश के आधार पर निर्भर करते हैं।
भारत में वैक्सीनेशन नीति पर काम करने वाले एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में बताया है कि भारत के पास स्मॉलपॉक्स वैक्सीन नहीं है। उन्होंने बताया कि 80 के दशक में बच्चों को स्मॉलपॉक्स वैक्सीनन देने का फैसला किया गया था क्योंकि ये बीमारी उस वक्त खत्म हो गई थी। उन्होंने कहा कि कुछ एलर्जिक रिएक्शन से स्किन पर दाने हो जाते थे, जिनमें दर्द होता था।
उन्होंने कहा कि स्मॉलपॉक्स के लिए दो वैक्सीन उपलब्ध हैं लेकिन हम नहीं जानते कि ये मंकीपॉक्स के लिए कितनी प्रभावि साबित हो सकती हैं। हालंकि अगर जरूरत पड़े तो इतने कम वक्त पर ये वैक्सीन मंगवाना भारत के लिए एक चुनौती है।