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Corona Vaccine shortage in India: केंद्र सरकार के पास भी नहीं है कोरोना वैक्‍सीन का स्‍टॉक, कोरोना अब दिखाएगा सबसे भयानक चेहरा

बिहार और आंध्र प्रदेश के पास तो 2 दिन का भी वैक्‍सीन स्‍टॉक नहीं है।

भारत में कोरोना वैक्सीन का स्टॉक कभी भी खत्म (Corona Vaccine shortage in India) हो सकता है। कई राज्य ऐसे भी हैं जहां वैक्सीन की कमी के कारण वैक्सीनेशन का काम रुक चुका है।

Written by Rashmi Upadhyay |Published : April 9, 2021 10:49 AM IST

एक ओर जहां भारत में कोरोना का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है तो वहीं दूसरे ओर कोरोना वैक्‍सीन का स्‍टॉक भी खत्‍म (Vaccine shortage in India) होने को है। भारत के कई राज्‍य ऐसे हैं जिनके पास वैक्‍सीन का स्‍टॉक खत्‍म लगभग खत्‍म हो चुका है। बीते गुरुवार को ही महाराष्‍ट्र के कई जिलों ने वैक्‍सीनेशन को रोकना पड़ा क्‍योंकि उनके पास मरीजों को लगाने के लिए वैक्‍सीन नहीं थी। ऐसे में राज्‍य सरकारों लगातार केंद्र सरकार से अपील कर रही हैं कि उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द वैक्‍सीन का स्‍टॉक दिलाया जाए। लेकिन क्‍या केंद्र सरकार के पास वैक्‍सीन है? जी नहीं, केंद्र सरकार के पास खुद वैक्‍सीन का स्‍टॉक खत्‍म होने वाला है। एक वेबसाइट के अनुसार केंद्र सरकार के पास सिर्फ अगले 5.5 दिनों के लिए वैक्सीन स्टॉक बचा हुआ है। ऐसे में एक्‍सपर्ट दावा कर रहे हैं कि वैक्‍सीन के कमी के कारण कोरोना अब अपना भयानक चेहरा दिखाएगा।

8 राज्‍यों में वैक्‍सीन की भारी कमी (Coronavirus vaccine shortages)

दिल्‍ली, महाराष्‍ट्र, बिहार, छत्‍तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलांगना, ओडिशा और हरियाणा ऐसे राज्‍य हैं जिनके पास सिर्फ लगभग 2 दिन के लिए वैक्‍सीन स्‍टॉक बचा हुआ है। बिहार और आंध्र प्रदेश के पास तो 2 दिन का भी वैक्‍सीन स्‍टॉक नहीं है। ऐसे में यहां के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रियों का कहना है कि टीके की कमी के कारण वैक्‍सीनेशन का काम कभी भी रुक सकता है और मरीजों को वापिस भेजना पड़ सकता है।आपको बता दें कि एक अप्रैल से 45 साल या उससे ज्यादा की उम्र के हर व्यक्ति को वैक्सीन लगाई जा रही है।

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क्‍या दूसरे देशों को वैक्‍सीन देने से खत्‍म हुआ स्‍टॉक?

कोविड टीकों की आपूर्ति और कमी को लेकर राज्य सरकारों और केंद्र के बीच की तल्खी के बीच, सच्चाई यह है कि भारत 1.6 अरब की प्री-बुकिंग से दुनिया में कोविड दवा का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। अमेरिका स्थित ड्यूक यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ इनोवेशन सेंटर के एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, भारत ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को 500 मिलियन डोज, अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स से एक अरब और रूसी स्पुतनिक वी वैक्सीन की 100 मिलियन खुराक के प्री ऑर्डर दिए थे।

कंपनी के पास नहीं है वैक्‍सीन बनाने के लिए पैसा

हालात ये है कि कंपनी चाहे भी तो जल्‍द वैक्‍सीन का निर्माण नहीं कर सकती है क्‍योंकि उसके पास फंड की कमी है। सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (serum institute of india) के CEO अदार पूनावाला ने हाल ही में कहा कि ज्‍यादा से ज्‍यादा मात्रा में कोविशील्‍ड वैक्‍सीन बनाने के लिए उनकी कंपनी को जून से पहले 3 हजार करोड़ रुपये की आवश्‍यकता होगी। उन्‍होंने कहा कि अभी संस्‍थान सिर्फ भारत के लिए वैक्‍सीन बनाने पर फोकस कर रहा है बावजूद इसके वो अभी भी भारत के हर नागरिक के लिए वैक्‍सीन बनाने में असमर्थता महसूस कर रहे हैं। हालांकि कंपनी पूरा प्रयास कर रही है कि भारत के हर व्‍यक्ति को जल्‍द से जल्‍द कोरोना वैक्‍सीन कोविशील्‍ड मिल सके।

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