केंद्र का बयान, ओमिक्रोन को सामान्य जुकाम-खांसी समझने की न करें भूल, जानिए कोविड टेस्ट को लेकर क्या कहा?

देश में बढ़ते ओमिक्रोन को लेकर डब्ल्यूएचओ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार लोगों को सावधान कर रहा है ऐसे में जरूरत है कि हम कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करें। 

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Written By: Atul Modi | Published : January 13, 2022 4:57 PM IST

देश में कोरोना और ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र ने लोगों को एक बार फिर सावधान किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने कहा है कि ओमिक्रोन कोई सामान्य जुकाम-खांसी नहीं है, और ओमिक्रोन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रेस ब्रीफिंग के दौरान नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल और आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं है।

नीति आयोग के सदस्य बीके पॉल ने कहा कि, विश्व स्वास्थ्य संगठन में दो सहकर्मियों के बयान से हम सहमत हैं कि ओमिक्रोन कोई आम जुकाम-खांसी नहीं है, ओमिक्रोन साधारण जुकाम नहीं है। यह इतना सिंपल और साधारण नहीं है कि हम इसको हल्के में ले। एक भावना बनी जा रही है कि क्या होगा, ऐसा नहीं सोचना चाहिए, और यह सोचे कि अगर इसका इस तरह से स्वरूप है तो यह भी है कि हमने बहुत ज्यादा वैक्सीनेशन किया है, यह डाटा में दिखाया गया है, इसीलिए हम बचे हुए हैं।

लेकिन इसे आम सर्दी-जुकम  नहीं समझना चाहिए, क्योंकि इसी ओमिक्रोन की वजह से कई देशों के हेल्थ सिस्टम ध्वस्त हो गए। इसी वजह से बहुत से हेल्थ वर्कर्स को छुट्टी लेकर घर पर बैठना पड़ा। इसलिए समाज की जिम्मेदारी है कि इसके संक्रमण को रोकें और व्यक्तिगत रूप से कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करें। मास्क लगाएं और वैक्सीन जरूर लगवाएं। क्योंकि वैक्सीन गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद कर रही है और यह फैक्ट है। आपने भी यह देखा है कि आंकड़ों में कि कुछ हद तक यह बीमारी से बचाव में मदद कर रही है। यह तथ्य बरकरार है कि वैक्सीनेशन हमारे कोविड रिस्पांस का एक महत्वपूर्ण पिलर है।

किन लोगों का कोविड-19 टेस्ट होना चाहिए?

आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल डॉ बलराम भार्गव ने कहा कि, कोरोना के लक्षणों वाले सभी लोगों का टेस्ट किया जाना चाहिए। कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में है सभी लोग जो हाई रिस्क पर हैं। यह वह लोग हैं जो 60 साल के ऊपर हैं, कोई गंभीर बीमारी हो, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, फेफड़ों की बीमारी, किडनी की बीमारी, कैंसर ,मोटापा जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इन सभी हाई रिस्क वाले कांटेक्ट का कोरोना टेस्ट कराया जाना चाहिए।

अस्पताल में किन लोगों का Covid-19 टेस्ट होना चाहिए?

डॉ बलराम भार्गव के मुताबिक, इलाज कर रहे डॉक्टर को तय करना चाहिए कि किसका टेस्ट कराना है, जिसमें एक महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी इमर्जेंसी प्रक्रिया सर्जरी और डिलीवरी में देरी सिर्फ इसलिए नहीं होनी चाहिए कि कोरोना टेस्ट नहीं हुआ। बिना लक्षणों वाले मरीज जो किसी सर्जरी या बिना सर्जरी वाली प्रक्रिया से गुजर रहे हैं जैसे प्रेगनेंसी, लेबर पेन जो अस्पताल में भर्ती हैं, उनका टेस्ट तब तक नहीं होना चाहिए जब तक कि उनमें खराब गला, बुखार, सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण ना हो।

किन लोगों का परीक्षण नहीं किया जा सकता है?

डॉ बलराम भार्गव ने कहा, कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आए बिना लक्षणों वाले लोगों का टेस्ट करने की जरूरत नहीं है अगर वह हाई रिस्क पर न हों।

image: unicef