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Written By: Pallavi Kumari | Published : July 20, 2022 12:02 PM IST
पहले कोरोनावायरस, फिर मंकीपॉक्स वायरस अब पैरीकोवायरस (Parechovirus) फैला है। दरअसल, अमेरिका में रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने पिछले हफ्ते एक हेल्थ अलर्ट जारी की है जिसमें माता-पिता और बाल रोग विशेषज्ञों और नए माता-पिताओं को चेतावनी दी है। एजेंसी ने कहा कि उसे मई से संक्रमण की कई रिपोर्टें मिलीं हैं। सीडीसी (CDC) ने कहा कि ज्यादातर रिपोर्ट में पीईवी-ए3 स्ट्रेन होता है, जो आमतौर पर गंभीर बीमारी से जुड़ा होता है। एजेंसी ने यह नहीं बताया कि किन राज्यों में संक्रमण की सूचना है या क्या वायरस से कोई मौत हुई है।
बोस्टन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. रिक मैले ने कहा कि पैरीकोवायरस, पोलियोवायरस जैसे एंटरोवायरस (enteroviruses) के समान सामान्य पैथोजेन है। ये वायरस चार प्रकार के होते हैं, जिनमें से केवल PeV-A ही मनुष्यों में रोग पैदा करने के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि PeV-A में कई प्रकार के स्ट्रेन होते हैं, लेकिन PeV-A3 आमतौर पर नवजात शिशुओं, बुजुर्गों और इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों में गंभीर बीमारी से जुड़ा होता है।
पैरीकोवायरस संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए नए नहीं हैं बल्कि दूसरे देशों में भी फैल सकता है। इसके अलावा विशेज्ञषों का कहना है कि ये पैथोजेन हर समय हमारे आसपास होते हैं। आमतौर पर गर्मियों में और अधिक बीमारियों का कारण बनते हैं। थोड़ा असामान्य यह है कि सीडीसी उन्हें कुछ महीने पहले से रिपोर्ट कर रहा है।
सीडीसी ने कहा कि संक्रमित लोग मल के संपर्क में आने और श्वसन मार्गों के माध्यम से वायरस को प्रसारित कर सकते हैं। एजेंसी ने कहा कि एक व्यक्ति श्वसन पथ के माध्यम से एक से तीन सप्ताह तक और जठरांत्र संबंधी मार्ग के माध्यम से छह महीने तक संक्रामक हो सकता है। सीडीसी ने कहा कि 6 महीने से 5 साल के बच्चों में सबसे अधिक देखे जाने वाले लक्षणों में श्वसन पथ का संक्रमण, बुखार और दाने शामिल हैं। 3 महीने से कम उम्र के शिशुओं में, लक्षणों (Parechovirus symptoms) में
-बुखार
-सेप्सिस
-रैशेज
-तंत्रिका संबंधी बीमारी शामिल हो सकती है, जिसमें दौरे और मेनिनजाइटिसशामिल हैं।
इसके अलावा मेनिनजाइटिस मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास के तरल पदार्थ और झिल्लियों की सूजन, सिरदर्द, बुखार और गर्दन में अकड़न हो सकती है। इसके अलावा बच्चों में बुखार, सुस्ती, चिड़चिड़ापन और अनियंत्रित गतिविधियां हो सकती हैं।
इसलिए फिलहाल, सीडीसी का कहना है कि नए माता-पिता इस वायरस को लेकर सतर्क रहें। साथ कि बच्चों में इनमें से कोई भी लक्षण नजर आए तो उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।