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Written By: Yogita Yadav | Updated : September 25, 2018 8:32 AM IST
ब्लू व्हेल की ही तरह इस गेम में भी प्लेयर को दिया जाता है खुद को खत्म करने का टास्क।
एक ही महीने के भीतर मोमो गेम चैलेंज की दहशत भारत में भी महसूस होने लगी है। कोलकात्ता के बाद अब सीबीएसई ने भी इस किलर गेम से बच्चों को बचाने के लिए सर्कुलर जारी कर दिया है। जिसमें अभिभावकों से बच्चों पर कड़ी नजर रखने और इंटरनेट से दूरी बनाने की सलाह दी गई है।
क्या है मोमो गेम चैलेंज
पहले ब्लू व्हेल गेम और अब मोमो गेम, यह दोनों ही ऐसे खेल हैं जो लोगों के लिए खासतौर पर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इसमें बच्चों को एक के बाद एक कई टास्क् दिए जाते हैं, जिसमें अंतिम टास्क में प्लेयर को खुद को खत्म करना होता है। मोमो गेम्स की वजह से लगातार बढ़ते हादसों को देखते हुए अब सीबीएसई ने भी एक सर्कुलर जारी किया है।
सीबीएसई ने सर्कुलर में क्या कहा है?
सीबीएसई के सर्कुलर में स्कूलों और अभिभावकों को बताया गया है कि वह अपने बच्चों को लेकर खास ध्यान रखें। सीबीएसई की तरफ से जारी सर्कुलर के बाद अब स्कूल प्रशासन भी अपनी तरफ से बच्चों को जागरूक करने और उन पर खास निगरानी रखने के लिए अलग-अलग कार्यक्रम चला रहे हैं। इसका मकसद यही है कि कैसे भी हो बच्चों को इस तरह के खतरनाक खेलों से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा सके।
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क्या अकेलापन है एक बड़ी वजह?
मनोवैज्ञानिकों की मानें तो ब्लूव्हेल और मोमो गेम के फैलने और जानलेवा होने की एक बड़ी वजह है अकेलापन। अकेलापन जो सब के आसपास होने के बावजूद लोगों और और खास तौर पर बच्चों को अपनी ओर खींचता है और जब लोगों और बच्चों को इस खेल के जरिए कुछ नई नई चीजें करने का प्रलोभन दिया जाता है। जिससे वो लोग इसके प्रति आकर्षित होते जाते हैं, बिना इस बात की परवाह किए हुए कि ये खेल जानलेवा भी साबित हो सकता है।
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अधूरे हैं साइबर सिक्योरिटी के इंतजाम
यह बात इस वजह से भी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जानकारों के मुताबिक इस तरह के खेलों पर सीधे तौर पर कोई प्रतिबंध नहीं लग पाता। क्योंकि जो लोग इन खेलों को बढ़ाते हैं वह एक के बाद एक सरवर चेंज करते रहते हैं जिसकी वजह से इन पर रोक लगाना आसान नहीं है। भारत में भी अभी तक साइबर सिक्योरिटी के इंतजाम पूरे नहीं हैं।