कैंसर का भी कारण बन सकता है अकेलापन, जानें इसके बारे में सब कुछ

अकेले रहने वाले लोगों में भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता और प्रदर्शन की क्षमता बहुत कम होती है, जिससे ये विभिन्‍न मानसिक बीमारियों के शिकार बन सकते हैं।

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Written By: Yogita Yadav | Published : November 17, 2018 8:01 PM IST

पांच हजार से ज्‍यादा फेबसुक फ्रेंड, कई चैट ग्रुप में सक्रियता और ट्वीटर पर भी फॉलोअर्स की भीड़… पर क्‍या वाकई यह भीड़ हमारा अकेलापन दूर कर पा रही है? अध्‍ययन बताते हैं कि विश्‍व भर में अकेलेपन के शिकार लोगों की संख्‍या बढ़ रही है, जिसके परिणाम इतने घातक हैं कि उससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जन्‍मने के भी कारण बनने लगते हैं। आइए जानते हैं कितनी घातक है सोशल आइसोलेशन।

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क्‍या कहते हैं शोध

शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जॉन कासिओपो के अनुसार, किसी एक क्षण में सोशल आइसोलेशन की वजह से करीब 20 प्रतिशत लोग नाखुश हैं। दशकों से शोधकर्ताओं ने हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर अकेलेपन और आइसोलेशन के प्रभावों का पता लगाया है। एक अध्ययन में पाया गया कि आइसोलेशन कैंसरग्रस्त ट्यूमर के विकास में वृद्धि कर सकता है। एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि यह स्मोकिंग और ओबेसिटी के बराबर रोगों के लिए भी एक जोखिम कारक है। अकेलापन अक्सर तनाव की ओर ले जाता है, जो कि कई स्थितियों में हमारे लिए एक जोखिम कारक है।

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अस्थिर होते हैं ऐसे लोग

हाल के वर्षों में, कासियोपो ने सोशली आइसोलेट दिमागों पर ध्यान दिया और उनकी टीम ने पाया है कि अकेले लोगों के दिमाग मजबूत सामाजिक नेटवर्क वाले लोगों की तुलना में अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं। शिकागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने लोनली और नॉन लोनली सब्जेक्ट्स को दोनों प्लीजेंट और अनप्लीजेंट सैटिंग वाले लोगों की तस्वीरें दिखायीं। प्लीजेंट पिक्चर्स को देखकर नॉन लोनली सब्जेक्ट्स ने लोनली सब्जेक्ट्स की तुलना में मस्तिष्क के एक भाग में बहुत अधिक गतिविधि को दिखाया, जिसे वैन्ट्रल स्ट्रायटम के रूप में जाना जाता है।

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वेंट्रल स्ट्रायटम लर्निंग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह मस्तिष्क के रिवार्ड केंद्र का भी हिस्सा है, जो भोजन और प्रेम जैसे पुरस्कारों से प्रेरित हो सकता है। लोनली सब्जेक्ट्स में सुखद चित्रों को देखते हुए इस क्षेत्र में बहुत कम गतिविधियां दिखाई देती हैं, जबकि अप्रिय तस्वीरें दिखाए जाने पर भी उनमें कम मस्तिष्क गतिविधि देखने को मिली थी। जब नॉन लोनली सब्जेक्ट्स ने अप्रिय चित्रों को देखा, तो उन्होंने टेम्पोरोपार्शियल जंक्शन में गतिविधि का प्रदर्शन किया, यह सहानुभूति से जुड़ा मस्तिष्क का एक क्षेत्र है, जिसमें नॉन लोनली सब्जेक्ट्स में कम प्रतिक्रिया थी।

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