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एक शरीर लेकिन आप हो सकते हैं कई कोविड वेरिएंट से पॉजिटिव! स्टडी में खुलासा कैसे आप होते हैं कोरोना पॉजिटिव

हाल ही में एक स्टडी में इस बात की ओर इशारा किया है कि कैसे कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट शरीर के अलग-अलग हिस्सों में छिपे रह सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे होता है ऐसा।

एक शरीर लेकिन आप हो सकते हैं कई कोविड वेरिएंट से पॉजिटिव! स्टडी में खुलासा कैसे आप होते हैं कोरोना पॉजिटिव
एक शरीर लेकिन आप हो सकते हैं कई कोविड वेरिएंट से पॉजिटिव! स्टडी में खुलासा कैसे आप होते हैं कोरोना पॉजिटिव

Written by Jitendra Gupta |Published : March 3, 2022 1:04 PM IST

बदलते वक्त के साथ-साथ कोरोना के नए-नए वेरिएंट सामने आ रहे हैं और सभी अपने मूल वायरस की तुलना में बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं और अब ये इंसानी शरीर के अलग-अलग अंगों को अपना निशाना बनाते हैं। इस बात का खुलासा हाल ही में एक स्टडी में हुआ है, जिसमें वैज्ञानिकों ने इस बात की ओर इशारा किया है कि कैसे कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट शरीर के अलग-अलग हिस्सों में छिपे रह सकते हैं और ये किसी भी संक्रमित रोगी को पूरी तरह से ठीक होने में दिक्कत दे सकते हैं।

कैसे वायरस बनाता है अंगों को निशाना

जर्नल नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित इस अध्ययन में ये भी बताने की कोशिश की गई है कि कैसे वायरस शरीर की अलग-अलग कोशिकाओं को अपना निशाना बनाता है और शरीर में रहते हुए हमारी इम्यूनिटी को कैसे अवशोषित कर लेता है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इमर बर्जर का कहना है कि वेरिएंट की एक लंबी श्रृंख्ला ने अब वायरस के मूल तत्व को पूरी तरह से बदल दिया है, जिसमें ओमिक्रोन और ओमिक्रोन के सब वेरिएंट बीए.2 दुनियाभर में फैले हुए हैं।

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बर्जर ने कहा कि हम ब्रिस्टल में शुरु में पाए गए ब्रिस्डेल्टा वेरिएंट के बारे में डेटा जुटा रहे हैं। इसने वायरस के मूल रूप से खुद को पूरी तरह से बदल लिया है लेकिन, जो सुरक्षा घेरा इसके चारों ओर हमने पाया हैं उसमें कोई बदलाव नहीं पाया गया है।

शरीर में अंगों में छिप जाता है वायरस

अध्ययन में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि किसी एक व्यक्ति के शरीर में एक वायरस के अलग-अलग प्रकार इकट्ठा हो सकते हैं। ब्रिस्डेल्टा स्टडी के मुख्य लेखक कपिल गुप्ता का कहना है कि इसके अलावा अध्ययन में ये भी बताने की कोशिश की गई है कि कैसे ये अलग-अलग अंगों को प्रभावित करता है। कोरोना के कुछ वेरिएंट्स किडनी या फिर स्पलीन कोशिकाओं का प्रयोग करते हैं और उनके भीतर ही छिप जाते हैं जबकि हमारा शरीर दूसरे प्रभावी वायरस से लड़ने में ही व्यस्त रहता है।

गुप्ता ने कहा कि यही वजह है कि संक्रमित लोगों के लिए कोविड से पूरी तरीके से पार पाना मुश्किल हो जाता है।

इम्यून सिस्टम को चकमा देते हैं वेरिएंट

शोधकर्ताओं के मुताबिक, वायरस का ये खुद को ढक लेने का प्रभावी तंत्र उसे इम्यून सिस्टम से बचाने का काम करता है। स्पाइक प्रोटीन में कमी लाकर इंफ्लेमेटरी फैटी एसिड पर दबाव बनाने की प्रक्रिया वायरस को इम्यून सिस्टम के प्रति कम दिखाई देने वाला बना देती है।

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दूसरे अध्ययन के मुख्य लेखक ओस्कर स्टॉफर का कहना है कि यही एक तंत्र हो सकता है, जिसके कारण हमारा इम्यून सिस्टम इसका पता लगने में नाकाम रहता है और मजबूत इम्यूनिटी होने की वजह से भी संक्रमण की कुल दक्षता बढ़ जाती है।

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