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दुनियाभर के कुछ देशों में कोरोनावायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के मामले सामने आने के बाद इसे एक वैश्विक खतरे के रूप में देखा जा रहा है। आलम ये है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसके जोखिम को देखते हुए रविवार को एक आकलन कर बहुत अधिक जोखिम वाले वेरिएंट के रूप में घोषित किया है। वैज्ञानिकों द्वारा दी गई शुरुआती जानकारी से इस बात का संकेत मिला है कि ओमिक्रोन में बहुत तेजी से फैलने की क्षमता है और ये वेरिएंट पहले के वेरिएंट के मुबाकले वैक्सीन से मिलनी वाली इम्यूनिटी को भेद पाने में सक्षम हो सकता है।
हालांकि अगर समय रहते इसे वेरिएंट का पता लगा लेते हैं तो इसे फैलने से रोका जा सकता है। इस बीच डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इस वेरिएंट से जुड़ी एक अच्छी खबर ये है कि दुनिया भर में कोरोनावायरस की पहचान के लिए इस्तेमाल किए जा रहे आरटी-पीसीआर डायग्नोस्टिक टेस्ट में इसका पता लगाया जा सकता है, जबकि दूसरे वेरिएंट में जेनेटिक स्क्वींसिंग के बाद ही वेरिएंट की पहचान की जा सकती है। यही कारण है कि आरटी-पीसीआर इस वेरिएंट का पता लगाने में तेजी ला सकता है और इसे फैलने से रोकने में मदद कर सकता है।
वहीं भारत के वैज्ञानिकों ने एक समाचार पत्र को इस संबंध में बताया है कि ये इतना आसान नहीं है क्योंकि भारत में अधिकांश आरटी-पीसीआर टेस्ट ओमिक्रोन और दूसरे वेरिएंट के बीच अंतर करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आरटी-पीसीआर टेस्ट ये पता लगाने में मदद कर सकता है कि व्यक्ति को संक्रमण है या नहीं लेकिन इसे ये पता लगाने के लिए डिजाइन नहीं किया गया है कि आप कौन से वेरिएंट का शिकार हैं या फिर किस वेरिएंट से संक्रमित हैं। कौन सा व्यक्ति किस वेरिएंट का शिकार है उसका पता लगाने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग स्टडी करनी ही होगी।
इसके अलावा सभी संक्रमित सैंप्ल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए नहीं भेजा जाता है, क्योंकि यह एक बहुत ही धीमी, जटिल और काफी महंगी तकनीक है। बता दें कि सभी पॉजिटिव टेस्ट का केवल 2 से 5 फीसदी मामलों को ही जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है।
गौरतलब हो कि आरटी-पीसीआर टेस्ट से मानव शरीर में वायरस के सिर्फ कुछ ही जीन के बारे में जानकारी मिलती है न कि सभी जीन सीक्वेंसिंग के बारे में । आमतौर पर किसी वेरिएंट का पता लगानेके लिए दो या दो से अधिक जीन के एक मैच की संभावना खोजी जाती है। अगर दो में से किसी एक के म्यूटेशन का पता चलता है तो दूसरे के फिर भी पॉजिटिव परिणाम प्राप्त होने की संभावना हो सकती है।
कई आरटी-पीसीआर टेस्ट शरीर में कोरोनावायरस स्पाइक प्रोटीन की पहचान करते हैं। ये एक ऐसा हिस्सा है, जो वायरस को मानव शरीर में प्रवेश करने की अनुमति प्रदान करता है। अगर स्पाइक प्रोटीन में म्यूटेशन हो रहा है, जैसा कि ओमिक्रोन वेरिएंट के मामले में है, तो इस बात की संभावना है शोधकर्ता म्यूटेशन की पहचान नहीं कर पाएंगे और रिजल्ट नेगेटिव ही प्राप्त होगा।
लेकिन जैसा कि हमने ऊपर बताया कि आरटी-पीसीआर टेस्ट एक से अधिक जीन की तलाश करता है। इसलिए, अगर टेस्ट के एक हिस्से में इंफेक्शन पाया जाता है और स्पाइक प्रोटीन में किसी प्रकार की कोई हलचल नहीं दिखाई देती है तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको ओमिक्रोन वेरिएंट हुआ है।