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पैरों के दर्द और कमजोरी को ना करें नजरअंदाज, दिल की बीमारियों का हो सकता है संकेत

पैरों के दर्द और कमजोरी को ना करें नजरअंदाज, दिल की बीमारियों का हो सकता है संकेत

Heart attack leg pain: आपके दिल की सेहत शरीर के लगभग हर अंग से जुड़ी हुई है। ऐसे में पैरों से जुड़ी समस्याएं भी आपके दिल की कमजोरी के लक्षण हो सकते हैं। कैसे, जानते हैं।

Written by Pallavi Kumari |Published : April 26, 2022 9:24 AM IST

दुनियाभर में खराब लाइफस्टाइल और डाइट के कारण दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। दिल से जुड़ी बीमारियों की शुरुआत की बात करें तो ये सबसे पहले खराब ब्लड सर्कुलेशन और उसके बाद हाई ब्लड प्रेशर से होती है। ये स्थिति समय के साथ बढ़ती जाती है और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। लेकिन हाल ही में आया शोध दिल की सेहत को लेकर आपको थोड़ा और परेशान कर सकता है। जी हां, नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (National Heart, Lung, and Blood Institute) के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी की है जिसमें कि मालूम पड़ता है कि दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित होने पर इसका असर हम अपने पैरों में देख सकते हैं। शोध बताता है कि जिन लोगों के पैरों में हमेशा दर्द या कमजोरी की समस्या रहती है उनमें ये खराब होते दिल की सेहत का संकेत (Can leg pain be a symptom of heart attack) हो सकता है। इसके अलावा भी ये शोध बहुत कुछ कहता है। आइए जानते हैं विस्तार से।

क्या कहता है ये शोध?

इस शोध में दिल से जुड़ी तमाम बीमारियों को लेकर बात की गई है और बताया गया है कि कैसे हमारे अंगों में आने वाली कमजोरी दिल से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा हार्ट फेल्योर नामक पत्रिका में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित 2009 का एक अलग अध्ययन बताता है कि पुरानी हृदय विफलता (एचएफ) वाले रोगी अक्सर मांसपेशियों की कमजोरी का अनुभव करते हैं जो शारीरिक कार्य को सीमित करता है। ऐसा ही कुछ हमारे पैरों की सेहत के साथ देखने को मिलता है।

सर्कुलेशन स्टडी की मानें तो, दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण हमारा ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित रहता है और इस वजह से ये हमारे पैरों में कमजोरी का कारण बनता है। दरअसल, ये इस परिकल्पना से जुड़ा हुआ है कि हार्ट फेल्योर मायोसिन अणु की मात्रा और कार्यक्षमता को बदलकर पैर की कमजोरी की ओर ले जाती है। ये एक प्रोटीन जो रासायनिक ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है, जिसके परिणामस्वरूप मस्कुलोस्केलेटल मूवमेंट होता है। अध्ययन के लेखकों का मानना ​​​​है कि इस प्रोटीन के नुकसान से अंततः मांसपेशियों में कमजोरी बन जाती है। यूसीएलए के अन्य शोधकर्ता कहते हैं कि तंत्रिका तंत्र (एसएनएस) की असामान्य सक्रियता दिल की विफलता वाले लोगों में होती है, और यह सुझाव देते हैं कि यह दिल की विफलता के रोगियों में मांसपेशियों की कमजोरी में भी योगदान दे सकता है।

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पैरों के दर्द और कमजोरी दिल की सेहत से कैसे जुड़ा हुआ है-Heart attack leg pain?

दिल की विफलता पैरों और टखनों में सूजन के सबसे आम कारणों में से एक है। अगर हृदय शरीर के चारों ओर रक्त को प्रभावी ढंग से पंप करने में असमर्थ है, तो ये अतिरिक्त रक्त का निर्माण कर सकता है, जिससे सूजन को सकती है और इसी को एडिमा के रूप में जाना जाता है। दिल की विफलता वाले लोगों के लिए, निचले पैरों, टखनों और पैरों में एडिमा होना आम है

इसके अलावा पैर के दर्द को क्लॉडिकेशन के रूप में जाना जाता है। क्लाउडिकेशन अन्य प्रकार के दर्द से अलग है जो गठिया या हड्डी या मांसपेशियों की समस्या से उत्पन्न होता है। यह आम तौर पर एक विशिष्ट पैटर्न का पालन करता है, जो जांघों में दर्द से शुरू होता है और समय के साथ बढ़ता जाता है। लेकिन जो भी हो आपको लगातार पैरों में हो रहे दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।