अलाइड एंड हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स बिल 2018 को मिली कैबिनेट में मंजूरी !

भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार की कोशिश में यह विधेयक हो सकता है मददगार।

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Published : November 22, 2018 6:38 PM IST

कैबिनेट ने सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा एवं सेवाओं के नियमन और मानकीकरण के लिए सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा पेशा विधेयक, 2018 को मंजूरी दे दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों द्वारा दी जाने वाली शिक्षा एवं सेवाओं के नियमन और मानकीकरण के लिए सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा पेशा विधेयक, 2018 को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक में एक भारतीय सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा परिषद और संबंधित राज्य सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा परिषदों के गठन का प्रावधान किया गया है, जो सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा पेशों के लिए एक मानक निर्धारक और सुविधाप्रदाता की भूमिका निभाएंगी।

क्यों है यह विधेयक आहम-

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वैश्विक कार्यबल, 2030 रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कार्यबल की वैश्विक मांग वर्ष 2030 तक लगभग 15 मिलियन रहने का अनुमान लगाया गया है। इस विधेयक के आने के बाद स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कार्यबल की वैश्विक मांग (किल्लत) पूरी करने का अवसर प्राप्त होगा।

ये हैं विधेयक के मुख्य बिंदु-

  • यह अनुमान लगाया गया है कि सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा पेशा विधेयक, 2018 से देश में सीधे तौर पर लगभग 8-9 लाख मौजूदा सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा संबंधी प्रोफेशनल और हर वर्ष कार्यबल में बड़ी संख्या में शामिल होने वाले एवं स्वास्थ्य प्रणाली में अहम योगदान देने वाले अन्य स्नातक प्रोफेशनल लाभान्वित होंगे। हालांकि, इस विधेयक का उद्देश्य मुहैया कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी प्रणाली को सुदृढ़ बनाना है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि इस विधेयक से देश की पूरी आबादी और समग्र रूप से समूचा स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र लाभान्वित होगा।
  • वर्तमान स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में ऐसे अनेक सहयोगी और स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनल कार्यरत हैं, जो अब तक न तो चिन्हित एवं विनियमित किए गए हैं और न ही जिनका अब तक अपेक्षा के अनुरूप इस्तेमाल किया जा रहा है। हमारी प्रणाली विभिन्न प्रोफेशनलों जैसे कि डॉक्टरों, नर्सों और अग्रणी पंक्ति में रहने वाले कामगारों (जैसे कि मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य सेवा सहायिका या आशा, सहायक नर्स मिडवाइफ या एएनएम) की सीमित श्रेणियों को सुदृढ़ करने पर अत्यंत केन्द्रित है। हालांकि, विगत वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे अन्य कामगारों की पहचान की गई है, जिनका उपयोग ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने और बेहतर करने में किया जा सकता है।
  • सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनल (एएंडएचपी) असल में स्वास्थ्य मानव संसाधन नेटवर्क का अभिन्न हिस्सा हैं और कुशल एवं दक्ष सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनल इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी देखभाल की लागत कम करने एवं बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने में अत्यंत मददगार साबित हो सकते हैं।
  • विश्व भर में ज्यादातर देशों में एक वैधानिक लाइसेंसिंग अथवा नियामकीय निकाय होता है, जो इस तरह के प्रोफेशनलों, विशेष कर सीधे तौर पर मरीजों की देखभाल करने वालों (जैसे कि फिजियोथेरेपिस्ट, पोषण विशेषज्ञ इत्यादि) अथवा मरीजों की देखभाल को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाले पेशों से जुड़े लोगों (लैब टेक्नोलॉजिस्ट, डॉसिमेट्रिस्ट इत्यादि) की योग्यताओं एवं सक्षमताओं को लाइसेंस देने एवं प्रमाणित करने के लिए अधिकृत होता है।
  • वैसे तो इस तरह के प्रोफेशनल कई दशकों से भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में मौजूद हैं, लेकिन व्यापक नियामकीय रूपरेखा के अभाव के साथ-साथ सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों (एएंडएचपी) की शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए समुचित मानक न होने के कारण सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में व्यापक कमी महसूस की जाती रही है।
  • इसे ध्यान में रखते हुए विधेयक में एक सुदृढ़ नियामकीय रूपरेखा या व्यवस्था स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है, जो सहयोगी एवं स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पेशों के लिए एक मानक-निर्धारक एवं नियामक की भूमिका निभाएगी।
Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source