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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : June 15, 2018 9:58 PM IST
राष्ट्रीय राजधानी में चिकित्सकों के यहां सांस की बीमारी और ऐसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ने की सूचना है। पिछले पांच दिनों में यह संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। इसके लिए दिल्ली व इसके आस-पास के क्षेत्र में धूल प्रदूषण को जिम्मेदार बताया जा रहा है। धूल और धुंध की एक मोटी परत पिछले हफ्ते से दिल्ली के आसमान पर छाया हुआ है। स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी होने लगी है।
क्यों है जानलेवा
पीएम 10 स्तर, जो 10 मिमी से भी कम व्यास वाले कणों की उपस्थिति से होता है, गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में 796 तक जा पहुंचा, जबकि दिल्ली में इसका स्तर 830 पर था। पीएम 2.5 का लेवल, माइक्रोस्कोपिक कण जो फेफड़ों में गहरे तक समा जाते हैं और सबसे ज्यादा नुकसान करते हैं, 320 पर दर्ज किया गया, जो कि एक बेहद अस्वास्थ्यकर स्थिति है।
क्या कहतें हैं एक्सपर्ट
हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल बताते हैं कि, "दिल्ली में प्रदूषण का मौजूदा स्तर गर्भ में पल रहे एक अजन्मे शिशु तक को प्रभावित कर सकता है। एक सामान्य वयस्क आराम की स्थिति में प्रति मिनट छह लीटर हवा अंदर खींचता है, जो शारीरिक गतिविधि के दौरान लगभग 20 लीटर तक बढ़ जाता है। वर्तमान में प्रदूषण के खतरनाक स्तरों को देखते हुए, यह फेफड़ों में केवल विषाक्त पदार्थो की मात्रा में ही वृद्धि करेगा।"
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, "वर्तमान स्थिति को देखते हुए सबसे अच्छी सलाह यह है कि जितना संभव हो सके घर में रहना चाहिए और धूल से दूर रहना चाहिए। घर के अंदर एयर प्योरीफायर का प्रयोग करें। जो लोग काम के सिलसिले में बाहर निकलने से नहीं बच सकते हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से मॉस्क का उपयोग करना चाहिए।"
हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने लोगों को कुछ सुझाव दिये हैं जिसके अमल से इससे होने वाले प्रभाव से बचा जा सकता है।
स्रोत:IANS Hindi.
चित्रस्रोत:Shutterstock.