
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 22, 2019 6:52 PM IST
मॉडल-अभिनेत्री ब्रूना अब्दुल्ला ने हाल ही में एक प्यारी सी बच्ची को जन्म दिया है। ब्रूना एक हेल्थ अवेयरनेस कैंपेन 'मिसिंगआई' को भी अपना समर्थन दे रही हैं। उनका कहना है कि उनमें आयोडीन की कमी नहीं है और इस वजह से वह अपनी बेटी को अच्छे से ब्रेस्ट फीडिग करा पाती हैं। ब्रूना हैशटैगमिसिंगआई कैम्पेन की हिस्सेदार हैं जो महिलाओं के शरीर में आयोडीन की कमी और इसके कारणों पर बात करती है।
क्या ब्रूना भी इस समस्या से जूझ रही हैं? इसके जवाब में उन्होंने आईएएनएस को बताया, "नहीं, बिल्कुल नहीं। इसी वजह से मैं अच्छे से ब्रेस्ट फीडिंग करा रही हूं।"
ब्रूना ने 31 अगस्त को अपनी बेटी इजाबेला का इस दुनिया में स्वागत किया। ब्रूना का मानना है कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी पहले से काफी बेहतर हो गई है। उन्होंने कहा, "सब कुछ अच्छे के लिए है। मैं उससे बहुत प्यार करती हूं और मैं वाकई में अपनी जिंदगी में इतना ज्यादा प्यार किसी और से नहीं कर सकती।"
मां का दूध मैक्रोन्यूट्रिएंट्स, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, बायोएक्टिव तत्वों और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले घटकों का एक मिश्रण होता है। यह मिश्रण एक दूध के रुप में बच्चे के आदर्श शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। यह बड़े होने के बाद में शिशु को मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारी की खतरे को भी कम करता है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिन बच्चों को केवल मां का दूध नहीं दिया जाता है, उन्हें संक्रमण का खतरा होता है और उनका आईक्यू भी कम रह सकता है। उनकी सीखने की क्षमता कम होती है और स्कूल में उन बच्चों के मुकाबले उनका प्रदर्शन कमजोर रहता है, जिन्हें पहले छह महीने सिर्फ मां का दूध मिला है।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, हर साल दो करोड़ से अधिक शिशुओं का वजन जन्म के समय 2.5 किलोग्राम से कम रहता है और दुर्भाग्य से इनमें से 96 प्रतिशत विकासशील देशों में हैं। बचपन में इन शिशुओं में सामान्य विकास में कमी, संक्रामक बीमारी, धीमी वृद्धि और मृत्यु होने का जोखिम अधिक होता है। ऐसे पर्याप्त प्रमाण मिले हैं जिनसे इन शिशुओं में जीवन के प्रथम 24 घंटों में स्तनपान का महत्व उजागर होता है। जिन शिशुओं को जन्म के 24 घंटे के भीतर स्तनपान कराया जाता है, उनमें उन बच्चों के मुकाबले मृत्यु दर कम देखने को मिली है, जिन्हें 24 घंटे बाद स्तनपान कराया जाता है।