
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : October 12, 2020 9:22 PM IST
दिमाग में फैले एक बड़े घाव (Brain Lesion) को सर्ज़री की मदद से निकालने में दिल्ली के डॉक्टरों को सफलता मिली है। समाचार एजेंसी आईएएनएस द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार, दिल्ली शालिमार बाग के फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने 33 वर्षीय महिला मरीज़ को दिमाग से यह घाव साफ किया है। डॉक्टरों ने इस मिनीमॅली इन्वेसिव, कंप्यूटर गाइडेड सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस मरीज के मस्तिष्क के ठीक बीचों-बीच एक ऐसा घाव बना हुआ था जिसकी वजह से बार-बार पीड़ित महिला को छोटे-मोटे ब्रेन हेमरेज की दिक्कत हो रही थी। डॉक्टरों के अनुसार, इस स्थिति में सर्जरी करना बहुत ही मुश्किल और खतरों से भरपूर पर्याय था। क्योंकि, सर्जरी के बाद कई तरह की जटिलताओं पैदा होने की आशंका थी। लेकिन, इस सर्जरी को डॉ. सोनल गुप्ता (डायरेक्टर एवं हेड, न्यूरोसर्जरी) तथा उनकी टीम में शामिल अन्य डॉक्टरों ने 5 घंटे में पूरा किया और इसमें सफलता पायी।
बताया जा रहा है कि, इस घाव की वजह से मरीज के शरीर के बाएं हिस्से में मोबिलिटी कम होने लगी थी। साथ ही बार-बार सिरदर्द की भी शिकायक हो रही थी , और बहुत अधिक कमजोरी भी महसूस हो रही थी। जब, एमआरआई स्कैन किया गया तो पता चला कि मस्तिष्क के मध्य भाग में एक बड़ा घाव हो चुका है।
मेडिकल टेस्टिंग्स में यह भी पता चला कि पीड़ित महिला को होने वाले सिरदर्द का कारण दिमाग में होने वाली ब्लीडिंग थी। जब भी यह ब्लीडिंग होती थी तो, मरीज के दिमाग में घाव का आकार थोड़ा और बढ़ जाता था। इसकी वजह से ब्रेन पर दबाव बढ़ने और उसके आसपास के सेल्स को भी डैमेज़ होता रहा। डॉक्टरों के अनुसार, यह घाव ऐसे स्पॉट पर था, जहां सर्ज़री करना बहुत मुश्किल था। इससे, ब्रेन के बहुत ही संवेदनशील हिस्से को नुकसान पहुंच सकता था। इससे, मरीज के लिए लकवाग्रस्त होने और आवाज़ बंद होने का ख़तरा बढ़ सकता था।
इस सर्ज़री को पूरा करने वाली डॉ. गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, ''हमने मिनीमॅली इन्वेसिव सर्जरी का विकल्प चुना ताकि हम स्थायी डैमेज़ के खतरे की संभावना कम से कम रखें। कंप्यूटरी गाइडेड सर्जरी (Computer Guided Surgery) ने हमें मस्तिष्क के घाव तक सीधे पहुंचने में मदद की और हम माइक्रोस्कोप की मदद से इसे निकालने में कामयाब रहे हैं। ऑपरेशन के बाद रिकवरी की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ी। सर्जरी के बाद 5वें दिन मरीज़ को अस्पताल से घर जाने की इजाज़त दे दी गयी। ''