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Written By: Jitendra Gupta | Updated : February 2, 2022 11:29 AM IST
क्या बॉडी टेम्परेचर से लगाया जा सकता है कोरोना का पता? जानें कितना सही है बॉडी टेम्परेचर जांचना
यूं तो कोरोनावायरस के ढेर सारे आम लक्षण हैं, लेकिन बुखार को आसानी से संक्रमण से जोड़ कर देखा जाता है। कोविड के 50 फीसदी से ज्यादा मामलों में पॉजिटिव व्यक्ति को ठंड और बुखार लगती है, खासकर शुरुआत में, जो ये पता लगना में काफी हद तक मदद करती है कि आपको संक्रमण हुआ है या नहीं। यही कारण है कि बहुत सी जगह पर बॉडी टेम्परेचर चेक किया जाता है ताकि संक्रमित लोगों को पहचाना जा सके और वायरस को फैलने से रोका जा सके। हालांकि सिर्फ टेम्परेचर चेक करना आपके लिए समस्या का सबब बन सकता है, खासकर बिना लक्षण वाले लोगों में। आइए जानते हैं कि सिर्फ बॉडी टेम्परेचर ही आपको कोरोना से बचा सकता है या नहीं।
शरीर के तापमान में वृद्धि कोरोना के सबसे आम संकेतों में से एक है लेकिन ये बात जानना जरूरी है कि यही सिर्फ एक लक्षण नहीं है। नाक बहना, सिरदर्द, थकान, गले में खराशजैसे शुरुआती लक्षण भी हैं, जिनका पता लगाना आपके लिए मुश्किल हो सकता है। आप सिर्फ शरीर के तापमान की जांच और उसके आधार पर लोगों को अलग नहीं कर सकते हैं, जिससे सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। हां, बॉडी टेम्परेचर उस स्थिति में आपके लिए मददगार हो सकता है, जब व्यक्ति में कोरोना के दूसरे लक्षण दिखाई दे रहे हों। ऐसा जरूरी नहीं कि अगर आपको बुखार नहीं है तो आपको संक्रमित नहीं हो सकते। ऐसे बहुत से मामले देखे गए हैं, जहां रोगी संक्रमित होता है और उसे बुखार नहीं होता है।
बहुत से अध्ययन बताते हैं कि इंफ्रारेड स्किन थर्मामीटर की स्टीकता डिजिटल थर्मामीटर के बराबर ही होती है लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि इसमें बहुत से गलतियां भी हो सकती हैं। ब्राजील के एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ था कि इंफ्रारेड थर्मामीटर से जांच के बजाए आपको सूंघने की शक्ति का टेस्ट कराना चाहिए, जो कोविड का पता लगना में ज्यादा प्रभावी सिद्ध हो सकता है क्योंकि स्वाद न आना या फिर सूंघने की शक्तिचली जाना भी संक्रामक रोग का एक अन्य लक्षण हो सकता है।
इस स्टडी के दौरान शोधकर्ताओं ने ये भी पता लगाया कि बॉडी टेम्परेचर जांचने से बहुत से मामलों में कोविड का पता नहीं लगाया जा सका है, जो कहीं न कहीं सिर्फ इस लक्षण को प्रमुख बनाने के दावे को खोखला साबित करता है।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है और कोई नहीं जानता कि ये कब खत्म होगा। हालांकि बॉडी टेम्परेचर जांचना सिर्फ एक तरीका है कि वायरस ज्यादा से ज्यादा लोगों तक न पहुंचे। ये 100 फीसदी सटीक नहीं होता है क्योंकि हर एक व्यक्ति अलग तरीके से रिएक्ट करता है और इंफेक्शन के खतरे को कम करने के लिए अपने-अपने स्तर पर कदम उठाए जाने चाहिए।
अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, जो पॉजिटिव पाया गया है और आपको खुद में लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो खुद को अलग कर लें। इसके अलावा अपने हाथ नियमित रूप से धोएं, हर समय मास्क पहनें और वायरस से बचने के लिए दूसरों से 6 फीट की दूरी बनाए रखें।