सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों के बहरेपन की जांच कराएगी BMC, इन 2 तरीकों से लगाया जाएगा बहरेपन का पता

बीएमसी के पास फिलहाल ऐसा कोई डेटा नहीं है, जिसमें ये पता लग सके कि कितने बच्चे बहरेपन के साथ पैदा होते हैं। इसके लिए जांच शुरू करने का फैसला किया गया है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 25, 2022 1:30 PM IST

मुंबई के सरकारी अस्पतालों में हर साल 70 हजार से ज्यादा पैदा होते हैं। इन बच्चों में किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या न हो इसके लिए बीएमसी ने सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले हर बच्चे में बहरेपन की जांच करने का फैसला किया है। बीएमसी इस बाबत जांच के लिए एक एजेंसी भी नियुक्त करेगी। बीएमसी के एक अधिकारी का कहना है कि बीएमसी बच्चे के पैदा होने के 24 से 48 घंटे में इन बच्चों की जांच करना चाहती है। इस जांच के लिए एक एजेंसी को नियुक्त किया जाएगा, जिसके लिए टेंडर निकाला गया है।

बच्चों का रिकार्ड नहीं

बीएमसी के पास फिलहाल ऐसा कोई डेटा नहीं है, जिसमें ये पता लग सके कि कितने बच्चे बहरेपन के साथ पैदा होते हैं।

47 अस्पतालों में शुरू होगी ये सेवा

बीएमसी के अधिकारी का कहना है इन सरकारी अस्पतालों में इस जांच को शुरू होने में कुछ महीने लगेंगे। बीएमसी अपने 47 अस्पातलों और जच्चा-बच्चा केंद्र में ये जांच शुरू करेगी।

इन 2 तरीकों से होगी बच्चों की पहचान

बीएमसी की मेडिकल सर्विस एंड एजुकेशन की निदेशक डॉ. नीलम एंड्राडे का कहना है कि ओटोअकॉस्टिक एमिशन टेस्ट (OAE) और ऑटेमेटेड ब्रेनस्टेम रिस्पॉन्स सिस्टम (AABRS) ये पहचानने में मदद करेगा कि कौन सा बच्चा बहरा है। अगर हम जन्म दोष की पहचान कर लेते हैं तो ये बच्चे की शुरुआती उम्र में ही उपचार में मदद करेगा। छह महीने के भीतर बच्चे को सुनने की क्षमता वाले उपकरण मिल सकते हैं, जो उसके संपूर्ण विकास में योगदान देंगे। अगर किसी बच्चे में बहरेपन या फिर सुनने की क्षमता कम होने का पता चलता है तो बीएमसी उपकरणों और दूसरे उपचार विकल्पों की मदद करेगी।

कान के पर्दे की सर्जरी

डॉ. नीलम ने कहा कि अगर एक उपकरण बच्चे की मदद नहीं कर पाता है तो कुछ वर्षों बाद उसके कान के पर्दे की सर्जरी का एक विकल्प बचता है। आमतौर पर कम से कम से 3 से 4 फीसदी बच्चे सुनने की समस्या के साथ पैदा होते हैं। हम हर बच्चे का रिकॉर्ड रखेंगे। इसके अलावा हम परिजनों से फॉलो अप टेस्ट कराने के लिए भी कहेंगे।

सर्जरी का खर्चा भी उठाएगी बीएमसी

बीएमसी के एक अधिकारी का कहना है कि बीएमसी, एनजीओ की मदद से कान के पर्दे की सर्जरी का खर्चा भी उठाएगी।

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