
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : December 4, 2023 9:22 PM IST
Doctors saver life of woman with ruptured uterus: मुंबई के सायन अस्पताल में बहुत ही मुश्किल प्रेगनेंसी में में एक ऐसी गर्भवती महिला की जान बचाने में डॉक्टर सफल रहे जिसका यूट्रस फट चुका था और जिसके बच्चे की मौत भी हो गयी थी। BMC संचालित लोकमान्य तिलक अस्पताल (सायन अस्पताल) के अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी कि अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम एक ऐसी गर्भवती महिला को बचा लिया जिसका गर्भाशय फट चुका था और उसमें बच्चा मर चुका था। यह महिला उत्तर-पूर्व मुंबई के गोवंडी उपनगर की रहने वाली है और इसकी प्रेगनेंसी के 38.2 सप्ताह पूरे हो चुके थे। 29 वर्षीय महिला को हाल ही में अस्पताल ले जाया गया था।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड परीक्षण करने पर पता चला कि गर्भ में ही महिला के बच्चे की मौत हो गई है और गर्भनाल पूरी तरह से उसके आंतरिक अंगों में फैला चुकी है। इस मुश्किल केस को हैंडल करने के लिए डॉ. निरंजन चव्हाण, डॉ. पुष्पा सी, डॉ. दर्शना अजमेरा, डॉ. मोनिका धौसाक और डॉ. स्वरा पटेल के नेतृत्व में एक टीम तैयार की गयी।
डॉ. चव्हाण ने कहा, “महिला को पिछले 12 घंटों से दर्द हो रहा था, हालांकि उसे ब्लीडिंग नहीं हो रही थी और न ही कोई लक्षण दिख रहे थे। पेट की जांच के दौरान पाया गया कि पेट काफी नरम और कोमल था और भ्रूण को भी महसूस किया जा सकता था। लेकिन यूट्रस के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं थी, और भ्रूण के दिल की धड़कन सुनाई नहीं दे रही थी।
गर्भवती महिला का एक चार साल का बेटा भी है। महिला दोबारा अल्ट्रासाउंड स्कैन के लिए भेजा गया, जिसमें खाली गर्भाशय दिख रहा था और पेट में गर्भाशय के बाहिने हिस्से में मृत भ्रूण दिखाई दिया।
डॉक्टरों की टीम ने महिला को आपातकालीन सर्जरी के लिए भेज दिया। डॉक्टर निचले हिस्से में कटे हुए घाव पर टांके लगाकर गर्भाशय को जोड़ने में सफल रहे, जिससे उसकी जान बचायी जा सकी। इसके साथ ही मृत भ्रूण को भी डिलिवरी कराकर बाहर निकाला जा सका। इस प्रक्रिया में मां के पेट में जमा तकरीबन आधा लीटर खून भी बाहर निकाला गया।
डॉ. चव्हाण ने कहा, 5 दिनों की पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के बाद, महिला को इसी सप्ताह अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जबकि, उसके बाद के सभी टेस्ट में सबकुछ ठीक पाया गया।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में LTMG अस्पताल के डीन डॉ. मोहन जोशी ने बताा कि पहले सीज़ेरियन करा चुकीं महिलाओं में गर्भाशय फटने की घटना लगभग 0.3 प्रतिशत (3/1,000 प्रसव) तक रहती है।
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