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Written By: Editorial Team | Updated : April 30, 2018 12:54 PM IST
कैंसर का कारण आनुवांशिक हो सकता है।.© Shutterstock
आउटडोर एलईडी स्क्रीन्स से निकलने वाली नीली रोशनी से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक दल ने यह निष्कर्ष निकाला है। ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटेर और बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (आईएसग्लोबल) ने मैड्रिड और बार्सिलोना में 4,000 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया कि जो लोग लेड की रोशनी में ज्यादा रहते हैं, उन्हें ऐसी रोशनी में कम रहने वालों की तुलना में ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा डेढ़ गुना बढ़ जाता है।
यह शोध एनवायर्नमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव्स नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। इसमें पाया गया कि एलईडी लाइट्स से निकलने वाली 'नीली रोशनी' शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है, जिससे नींद का पैटर्न बदल जाता है। इससे शरीर में हार्मोन के स्तर पर असर होता है।
ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर दोनों हार्मोन से जुड़ी खराबी के कारण होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की अंतर्राष्ट्रीय कैंसर शोध एजेंसी (आईएआरसी) ने मनुष्यों के लिए रात के समय या नाइट शिफ्ट में काम करने को कैंसर का खतरा बताया है।
आईएसग्लोबल की शोधार्थी और अध्ययन की संयोजक मेनोलिस कोजेविन्स ने बताया, "इस शोध में हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि शहरों में रात में रोशनी में रहने से कहीं इन दोनों तरह के कैंसर के विकास का संबंध तो नहीं है।"
स्रोत:IANS Hindi
चित्रस्रोत:Shutterstock.