पश्चिम बंगाल में 'Black fever' के मामले मिलने से कई राज्यों पर मंडरा रहा है खतरा! जानें क्या है ब्लैक फीवर

West bengal news: पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ ही हफ्तों में ब्लैक फीवर के लगभग 65 से अधिक मामले पाए गए हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग सख्त है। जानें क्या है ब्लैक फीवर, इसके लक्षण और यह भारत के किस हिस्से में ज्यादा प्रभावी है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : July 18, 2022 10:15 AM IST

Black fever in west Bengal: सिर्फ कुछ ही हफ्तों के भीतर पश्चिम बंगाल के 11 जिलों में लगभग 65 से भी अधिक मामले काला अजर यानी ब्लैक फीवर के मिल चुके हैं। वैसे को पश्चिम बंगाल के ब्लैक फीवर पूरी तरह से खत्म हो चुका था, लेकिन हाल ही में हुई जांच से मिले मामलों ने फिर से लोगों के बीच में भय का माहौल बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई न्यूज एजेंसी को बताया कि अब ये जो मामले पाए गए हैं, उनसे निपटने में राज्य सक्षम होगा। कोरोना महामारी ने अभी तक दुनिया का पीछा नहीं छोड़ा है और हर व्यक्ति मानसिक या शारीरिक किसी न किसी रूप में प्रभावित हुआ है। ऐसे में कुछ ही हफ्तों के भीतर ब्लैक फीवर के मामले देखना एक बुरा संकेत हो सकता है और स्वास्थ्य विभाग को इस पर सख्त होना भी बहुत जरूरी है। झारखंड में कुछ महीने पहले एक व्यक्ति की ब्लैक फीवर से मृत्यु हो गई थी। रिपोर्ट्स की मानें तो राज्य में इससे 8 साल में पहले बार किसी व्यक्ति की इस बीमारी से मौत हुई थी।

क्या है काला अजर

(What is black fever) इसे ब्लैक फीवर या मेडिकल भाषा में विसेरल लीशमनियासिस के नाम से भी जाना जाता है। यह रोग मक्खी के काटने से फैलता है। इन मक्खियों को सैंडफ्लाई भी कहा जाता है और ये वे मक्खियां होती हैं, जिनके शरीर पर बाल होते हैं। दरअसल, अगर कोई मक्खी ‘लीशमैनिया डोनोवानी’ नामक प्रोटोजोआ परजीवी से संक्रमित है, तो उस मक्खी के काटने से यह परजीवी शरीर में चला जाता है और संक्रमित कर देता है।

क्या हैं काला अजर के लक्षण

(Symptoms of black fever) लगातार कई दिनों तक बार-बार बुखार आना इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में से एक है माना जाता है। इसके अलावा तिल्ली व लिवर का आकार बढ़ना, एनीमिया और शरीर का वजन कम होना भी ब्लैक फीवर के लक्षण हो सकते हैं। काला अजर के मरीजों की त्वचा रूखी हो जाती है और पतली पड़ जाती है। काला अजर से ग्रसित कुछ लोगों की त्वचा के बाल भी उड़ने लग जाते हैं।

कैसे किया जाता है इसका इलाज

(Treatment of black fever) काला अजर का इलाज करने के लिए एंटी-‘लीशमैनियल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जो एंटी-प्रोटोजोआ पैरासाइट दवाएं होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी वेक्टर कंट्रोल जारी किया गया है, जिसमें स्प्रे व अन्य कीट मारने वाली दवाओं का उपयोग करके मक्खियों को कम किया जाता है, ताकि इस रोग के होने और फैलने के खतरे को कम किया जा सके।

पश्चिम बंगाल के कौन से जिले हैं प्रभावित

पश्चिम बंगाल में इसके सबसे ज्यादा मामले आमतौर पर दार्जीलिंग, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और कलिमपोंग में पाए गए हैं। वहीं बीरभूम, बांकुड़ा, पुरुलिया और मुर्शिदाबाद में इसके थोड़े-बहुत मामले ही देखे गए हैं। अगर पश्चिम बंगाल के कोलकाता की बात करें तो अभी तक काला अजर को कोई मामला सामने नहीं आया है।

ये राज्य भी हैं खतरे में

ब्लैक फीवर आमतौर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल का स्थानिक रोग है। हालांकि, देशभर में बीतते समय के साथ-साथ ब्लैक फीवर का खतरा कम होता गया है। अगर आंकड़ों की बात करें को 2014 में ब्लैक फीवर के 9200 मामले पाए गए थे, जबकि 2021 मात्र 1276 मामले ही दर्ज किए गए।

16 करोड़ से भी अधिक लोगों को खतरा

बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में रहने वाले लोगों को काला अजर होने का खतरा सबसे अधिक है। नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज (NCVBDC) के अनुसार ब्लैक फीवर का खतरा 16.5 करोड़ लोगों पर मंडरा रहा है।

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