10 करोड़ लोगों के दिलों का ख्याल! अब बिहार में ही हो रहा हार्ट की सभी जटिल बीमारियों का इलाज

बिहार में 10 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को पर्याप्त रूप से हार्ट की बीमारियों से जुड़ी सुविधाएं नहीं मिल पा रही थी। हाल ही में हार्ट बिहार का पहला हार्ट हॉस्पिटल लोगों की इस समस्या को दूर करने में काफी मदद कर सकता है।

WrittenBy

Written By: Mukesh Sharma | Published : May 10, 2024 1:45 PM IST

WrittenBy

Medically Verified By:

हार्ट से जुड़ी समस्याएं इमरजेंसी में आती हैं और कुछ समय पहले तक ही बिहार के लोगों को हृदय से जुड़ी समस्याओं के इलाज व जांच आदि के लिए सैंकड़ों से हजारों किलोमीटर जाना पड़ता था। हार्ट की किसी भी बीमारी के इलाज के लिए 10 करोड़ से ज्यादा बिहारवासी दिल्ली, कोलकाता, वेल्लोर जैसे शहरों के हॉस्पिटल का रुख करते थे। करोड़ों लोगों के लिए यह मजबूरी थी, क्योंकि राज्य में हार्ट का कोई डेडिकेटेड एडवांस हॉस्पिटल नहीं था। उस समय बिहार में हार्ट की बीमारियों के लिए सरकारी हॉस्पिटल इंदिरा गांधी हृदय संस्थान ही एकमात्र सहारा था, लेकिन वहां सीमित (सेकेंडरी) सुविधाएं उपलब्ध थीं। हार्ट हॉस्पिटल पटना के मैनेजिंग डायरेक्टर एंड चेयरमैन डॉक्टर राजन ठाकुर ने इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की।

ऐसे में बिहार के 10 करोड़ से ज्यादा लोगों की उम्मीद की किरण बनकर उभरा हार्ट हॉस्पिटल, जो राजधानी पटना के कंकड़बाग में स्थित है। स्वर्गीय डॉक्टर एके ठाकुर ने कम खर्च में हार्ट की बीमारियों के सबसे बेहतर इलाज के विजन के साथ 1994 में हॉर्ट हॉस्पिटल की शुरुआत की। बीते तीन दशक में हार्ट हॉस्पिटल हृदय/दिल की बीमारियों के इलाज के भरोसेमंद केंद्र के रूप में उभरा है। इस सफर में हॉर्ट हॉस्पिटल ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां भी हासिल की हैं और अपनी श्रेणी में सर्वप्रथम बनकर उभरा है।

हार्ट हॉस्पिटल हृदय रोगों के इलाज के लिए प्राइवेट सेक्टर में बिहार का पहला अस्पताल है। यह हॉस्पिटल अब तक ढाई लाख से ज्यादा लोगों की बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज कर चुका है, जिनमें कई पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री व आईएएस-आईपीएस अधिकारी शामिल हैं। यह राज्य का पहला टर्शियरी केयर कार्डियक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल है, जिसे आईएसओ 9001 सर्टिफिकेशन मिला है।

हॉर्ट हॉस्पिटल में आज के समय में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर इम्पलांटेशन, सीएबीजी, वाल्व रिप्लेसमेंट और डबल वॉल्व रिप्लेसमेंट जैसी सुविधाएं किफायती दरों में उपलब्ध हैं। कुछ समय पहले तो हार्ट हॉस्पिटल ने एक 92 साल के बुजुर्ग की सफल एंजियोप्लास्टी करने में कामयाबी हासिल की थी। वहीं एक 100 साल के बुजुर्ग की सफल बाईपास सर्जरी भी यहां की जा चुकी है। हॉर्ट हॉस्पिटल की सफलता की दर न सिर्फ भारत में बल्कि एशिया व पूरी दुनिया के सफलतम में से एक है।

हार्ट हॉस्पिटल के फाउंडर स्वर्गीय डॉ एके ठाकुर की गिनती अपने जमाने के सबसे अच्छे हृदय रोग विशेषज्ञों में की जाती थी। वह पटना स्थित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के डायरेक्टर रह चुके थे। हार्ट हॉस्पिटल की शुरुआत ओपीडी, क्रिटिकल केयर यूनिट, इनडोर बेड और नर्सिंग होम की सीमित सुविधाओं के साथ हुई थी। 2004 में हार्ट हॉस्पिटल में कैथीटेराइजेशन और कार्डियोथोरेसिक सुविधाएं शुरू हो गईं। इस तरह यह बिहार का पहला टर्शियरी केयर कार्डियक फैसिलिटी वाला अस्पताल बन गया।

हॉर्ट हॉस्पिटल का उद्देश्य बिना गुणवत्ता से समझौता किए कम खर्च में हृदय रोगों का सबसे बेहतर इलाज मुहैया कराना है। इसके लिए हॉस्पिटल में सबसे अच्छे डॉक्टरों की टीम तैयार की गई है, जो मेदांता मेडिसिटी (नई दिल्ली), फोर्टिस एस्कॉर्ट्स (नई दिल्ली), मद्रास मिशन मेडिकल इंस्टीट्यूट (चेन्नई), बीएम बिरला हॉस्पिटल (कोलकाता) समेत कई विदेशी संस्थानों में प्रशिक्षित हुए हैं। यही कारण है कि हार्ट हॉस्पिटल में हृदय रोगों के मरीजों की मोर्टलिटी व मोबिलिटी रेट बेहद कम है।

हार्ट हॉस्पिटल समय-समय पर राज्य के विभिन्न इलाकों में मेडिकल शिविरों का आयोजन करते रहता है। हॉस्पिटल के द्वारा लगातार कॉन्फ्रेंस और मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम भी कराए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में मेदांता मेडिसिटी (नई दिल्ली) के डॉ नरेश त्रेहन और डॉ मधुकर शाही, जसलोक हॉस्पिटल (मुंबई) के डॉ अश्विन बी मेहता, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट (बच्चों के हृदय रोगों के विशेषज्ञ) डॉ एस राधाकृष्णन और वॉकहार्ट के डॉ आलोक रंजन जैसे नामी हृदय रोग विशेषज्ञ शामिल होते रहते हैं। हार्ट हॉस्पिटल को देश की सबसे बड़ी दवा कंपनियां कई बार दवाओं के परीक्षण में भागीदार बना चुकी हैं।

इस तरह अब बिहार व पड़ोसी राज्यों को हार्ट संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर भागने की मजबूरी नहीं रहती है। देश-दुनिया के सबसे बेहतर डॉक्टरों व सुविधाओं के साथ तमाम जटिल हृदय रोगों का इलाज भी अब बिहार में हो रहा है, और इसे संभव बनाया है 30 साल पहले शुरू हुए हार्ट हॉस्पिटल ने।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source