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Written By: Atul Modi | Published : September 14, 2021 6:22 PM IST
कोरोनावायरस की तीसरी लहर को लेकर देश और दुनिया के वैज्ञानिकों के सामने आते रहे हैं। हालांकि अभी भारत में कोरोना की दूसरी लहर खत्म नहीं हुई है, मगर तीसरी लहर के आने के कयास लगाए जा रहे हैं। तीसरी लहर लोगों को कितना नुकसान पहुंचाएगी इस बात का सिर्फ अनुमान ही लगाया जा रहा है।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के जूलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर जेनेटिसिस्ट (वरिष्ठ आनुवंशिकीविद्) प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा है कि, कोरोनावायरस की तीसरी लहर कम गंभीर और घातक होगी। वैज्ञानिक ने यह बात उन लोगों के लिए कही है जिन लोगों ने वैक्सीन लगवा ली है या जो लोग एक बार कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। उनका कहना है कि ऐसे लोगों पर कोरोना का असर कम होगा।
दिल्ली एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया सितंबर अक्टूबर में तीसरी लहर के आने की संभावना जता चुके हैं। मगर बीएचयू के वैज्ञानिक प्रोफेसर चौबे ने यह दावा किया है कि, कोरोना की लहर कम से कम 3 महीने बाद आएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि देश भर में चल रहे कोरोनावायरस टीकाकरण से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और वह कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने में सक्षम होंगे।
प्रोफेसर चौबे का कहना है कि जैसा कि हर 3 महीने में एंटीबॉडी का स्तर गिरता है, तीसरी लहर की संभावना होती है। इस मायने में अगर अगले 3 महीने में एंटीबॉडी का स्तर गिरता है तो तीसरी लहर आ सकती है, मगर मौजूदा वैक्सीनेशन अभियान वायरस से लड़ने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि जहां वायरस को रोका नहीं जा सकता, वहां मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।
प्रोफेसर चौबे ने कहा है कि बीच-बीच में कोरोनावायरस अपना सिर उठाएगा लेकिन अंतत आवा कम हो जाएगा एक बार एंटीबॉडी का स्तर कम होने पर कोरोनावायरस से संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाएगी।
चौबे ने कहा, अगर हमारी पूरी आबादी कोरोनावायरस से संक्रमित हो जाती है और हम मृत्यु दर को 0.1 या 1 प्रतिशत से भी कम रखते हैं, तो हम यह युद्ध जीतेंगे।