Add The Health Site as a
Preferred Source
Add The Health Site as a Preferred Source

बीएचयू के मेडिकल साइंस का दावा, गंगाजल में मौजूद बैक्टीरिया 'बैक्टीरियोफाज' करेगा कोरोनावायरस का नाश

बनारस हिंदु विश्वविद्यालय के मेडिकल साइंस की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि गंगाजल में मौजूद बैक्टीरिया बैक्टीरियोफेज से कोरोना का नाश (Destruction of coronavirus) हो सकता है। गंगाजल में हजारों प्रकार के बैक्टीरियोफाज होते हैं, जो बेहद ही गुणकारी होते हैं। यह शरीर में प्रवेश करने पर सभी प्रकार के वायरस को मार देता है।

बीएचयू के मेडिकल साइंस का दावा, गंगाजल में मौजूद बैक्टीरिया 'बैक्टीरियोफाज' करेगा कोरोनावायरस का नाश
बीएचयू के मेडिकल साइंस का दावा, गंगाजल में मौजूद बैक्टीरिया 'बैक्टीरियोफाज' करेगा कोरोनावायरस का नाश।

Written by Anshumala |Published : September 14, 2020 6:21 PM IST

Can Gangajal treat Covid-19: कोरोना से बचाव के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक वैक्सीन बनाने में लगे हुए हैं, तो भारत में बीएचयू के प्रोफेसर ने दावा किया है कि गंगाजल से कोरोना से मुक्ति (covid-19 treatment by gangajal) मिल सकती है। बनारस हिंदु विश्वविद्यालय (BHU) के मेडिकल साइंस की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि गंगाजल के बैक्टियोफॉज से कोरोना का नाश (Destruction of coronavirus) हो सकता है। इस बात का दावा किया है बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विजय नाथ मिश्रा ने।

उनका कहना है कि 1896 में जब कालरा महामारी (Cholera Pandemic) आई थी, तब डॉ. हैकिंन ने एक रिसर्च किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो गंगाजल का सेवन करते हैं, उन्हें कालरा नहीं हो रहा है। हालांकि, वह रिसर्च काफी दिनों तक पड़ा रहा। फिर करीब 1940 में एक खोज हुई तो पता चला कि गंगाजल (Ganga water) में एक ऐसा बैक्टीरिया पाया जाता है, जो वायरस को नष्ट कर देता है। उसका नाम बैक्टीरियोफेज या फाज (Bacteriophage) है।

गंगा में 1300 प्रकार के होते हैं बैक्टीरियोफेज

गंगा में वायरस से लड़ने के लिए बैक्टीरिया मिल रहे हैं। 1980 में यह पता चला कि बैक्टीरियोफेज सभी नदियों में मिलते हैं, लेकिन गंगा में 1300 प्रकार के पाए जाते हैं। यमुना में 130 प्रकार और नर्मदा में 120 प्रकार के मिलते हैं। यह फेज या फाज गंगा नदी के पानी में ज्यादा पाए जाते हैं। इसके निहितार्थ दो देशों ने जार्जिया और रूस ने समझा है। जार्जिया में कोई एंटीबायोटिक नहीं खाता है। वहां पर फेज पिलाकर इलाज किया जाता है। वहां प्रयोगशालाएं भी हैं। जहां पर एंटीबायोटिक का असर करना बंद हो जाता है, वहां फेज या फाज से इलाज किया जाता है।

Also Read

More News

1980-90 में भी फाज से मरीजों का किया गया इलाज

बीएचयू में 1980-90 के बीच जले हुए मरीजों को फाज के जरिए प्रो. गोपालनाथ ने इलाज किया था। तब कई मरीज ठीक हुए थे। जब कोरोना (Corona) आया, तो डॉ. बोर्सिकि ने बताया कि इनके विरुद्ध कोई लिविंग वायरस प्रयोग कर सकते हैं, जिस प्रकार टीबी के लिए बीसीजी का कर रहे हैं। बीसीजी में कोई दवा नहीं होती है। इसमें लाइव बैक्टीरिया होता है। इससे कोई नुकसान नहीं होता है। इससे टीबी खत्म होता है।

गंगाजल के औषधीय गुणों और  बैक्टीरियोफाज का पता लगाना है जरूरी

इसके लिए गंगा मामलों के एक्सपर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के एमिकस क्यूरी एडवोकेट अरुण गुप्ता ने अप्रैल में राष्ट्रपति को पत्र लिखते हुए कहा था कि गंगाजल के औषधीय गुणों और बैक्टीरियोफाज का पता लगाया (covid-19 treatment by gangajal) जाना चाहिए। लेकिन, 10 मई को आईसीएमआर (ICMR) ने इसे यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि इसकी कोई क्लीनिकल स्टडी नहीं कि हम गंगा के पानी से कोई इलाज कर सकें। उसके बाद हम लोगों ने एक ग्रुप बनाया रिसर्च करना शुरू कर दिया। 112 जर्नल निकाले। बैक्टीरियाफा की स्टडी की। इसका वायरोफाज नाम दिया।

फाजबैक्टीरिया से कोरोना संक्रमण का इलाज

फाजबैक्टीरिया के जरिया कोरोना संक्रमण (Corona infection) का दो विधियों से इलाज किया जा सकता है। यह वायरस नाक में अटैक करते हैं। इसके लिए अरुण गुप्ता ने गंगोत्री से 20 किलोमीटर नीचे गंगाजल लिया। टेस्ट किया वहां फेज की गुणवत्ता अच्छी थी। इसका नोज स्प्रे बना दिया गया। फिलहाल इसका क्लीनिकल ट्रायल होना है। इस बात को साबित करने के लिए कि गंगा का पानी कितना फायदेमंद (covid-19 treatment by gangajal in hindi) है, गंगा के किनारे रहने वाले 490 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें 274 ऐसे लोग हैं, जो रोज गंगा में नहाते हैं, उसका पानी पीते हैं। उनमें से किसी को भी कोरोना (Coronavirus) नहीं है। इसमें 90 वर्ष के बुजुर्ग भी शामिल हैं। 217 लोग भी इसी दायरे में रहते हैं। वह गंगाजल का इस्तेमाल नहीं करते। उनमें 20 लोगों को कोरोना हो गया है, जिसमें 2 की मौत हो गई है। यह एक संकेत है। एथिकल कमेटी यदि अरुण गुप्ता को इजाजत देगी तो ट्रायल शुरू हो जाएगा। बैक्टीरियोफाज से बनाए गए स्प्रे से कोरोना का मुकबला किया जा सकता है।

फाज सभी प्रकार के वायरस को मारने की क्षमता रखता है

गंगाजल में हजारों प्रकार के बैक्टीरियोफाज होते हैं, जो बेहद ही गुणकारी (corona treatment by gangajal) होते हैं। यह शरीर में प्रवेश करने पर सभी प्रकार के वायरस को मार देता है। फाज वायरस के अलावा श्वसन तंत्र वायरस को भी नष्ट कर सकता है। गुप्ता ने अपनी इस स्टडी को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक को भेजा, जिसे बाद में राष्ट्रपति ने आईसीएमआर को भेज दिया। लेकिन, इस पर आईसीएमआर ने रिसर्च करने से मना कर दिया। फिर उन्होंने बीएचयू की टीम से संपर्क किया। इसके लिए करीब 5 डाक्टर्स की टीम बनाई गई और फिर क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया है। इसमें पाया गया है कि यह फाज कोरोना को नष्ट कर सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किए पोस्ट कोविड केयर के लिए नए दिशा निर्देश, च्यवनप्राश, आयुष क्वाथ से बढ़ाएं इम्यूनिटी

Add The HealthSite as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

खुशखबरी! स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा, 2021 की शुरुआत में आ जाएगी कोरोना की वैक्सीन

About the Author

... Read More