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नाक से दी जाने वाली कोविड वैक्सीन के लिए भारत बायोटेक ने कि वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार

वैक्सीन्स बनाने वाली अग्रणी निर्माता और फार्मा कम्पनी  भारत बायोटेक (Bharat Biotec ) ने कोविड-19 के 'नोवल चिम्प एडेनोवायरस, सिंगल डोज इंट्रानेजल' वैक्सीन के लिए सेंट लुइस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ लाइसेंसिंग समझौता किया है। इस बाबत बुधवार को कम्पनी की तरफ से आधिकारिक घोषणा भी की गयी।

नाक से दी जाने वाली कोविड वैक्सीन के लिए भारत बायोटेक ने कि वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार

Written by Sadhna Tiwari |Published : September 23, 2020 6:54 PM IST

Covid-19 Vaccine:  कोरोना वायरस की वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) बनाने के लिए भारत बायोटेक ने वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ एक समझौता किया है।  मिली जानकारी के मुताबिक, वैक्सीन्स बनाने वाली अग्रणी निर्माता और फार्मा कम्पनी  भारत बायोटेक (Bharat Biotec ) ने कोविड-19 के 'नोवल चिम्प एडेनोवायरस, सिंगल डोज इंट्रानेजल' वैक्सीन के लिए सेंट लुइस में वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ लाइसेंसिंग समझौता किया है। इस बाबत बुधवार को कम्पनी की तरफ से आधिकारिक घोषणा भी की गयी। (Covid-19 Vaccine )

भारत में होगा सिंगल डोज इंट्रानेजल कोविड-19 वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल:

मिली जानकारी के मुताबिक,  जहां एक ओर परीक्षण के पहले चरण का ट्रायल सेंट लुइस यूनिवर्सिटी की 'वैक्सीन एंड ट्रीटमेंट इवैल्यूएशन यूनिट' में होगा, वहीं भारत बायोटेक आवश्यक विनियामक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद, भारत में क्लिनिकल परीक्षणों के आगे के चरणों को आगे बढ़ाएगा और हैदराबाद के जीनोम वैली में स्थित जीएमपी सुविधा में वैक्सीन के बड़े पैमाने पर निर्माण का कार्य करेगा।  भारत के हैदराबाद शहर में स्थित भारत बायोटेक कंपनी के पास अमेरिका, जापान और यूरोप के बाजारों के अलावा दुनिया के लगभग सभी देशों के बाज़ारों में वैक्सीन के डिस्ट्रिब्यूशन करने के अधिकार हैं।

भारत बायोटेक के अनुसार, इस इंट्रानेजल वैक्सीन ने चूहों पर अध्ययन में सुरक्षा के अभूतपूर्व स्तर को दिखाया है। प्रौद्योगिकी और डेटा को हाल ही में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'सेल' में और 'नेचर' के एक संपादकीय में प्रकाशित किया गया है।

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इस विषय में बात करते हुए भारत बायोटेक के अध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा एला ने जानकारी दी, " भारत बायोटेक के लिए इस इनोवेटिव वैक्सीन से जुड़ा कार्य और सहयोग करने की बात बहुत ही गर्व पूर्ण है।  हमें  इस बात की उम्मीद है कि भारत बायोटेक इस वैक्सीन की 1 अरब खुराकें तक बनाने में सफल होगी ।

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क्यों खास है यह वैक्सीन?

कृष्णा एला ने बताया कि , इंट्रानेजल वैक्सीन्स की खासियत यही होती है कि ये न केवल एडमिनिस्ट्रेश के लिहाज से आसान होती हैं।  बल्कि, इस प्रकार की वैक्सीन्स से सुई और सीरिंज सहित अन्या चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों के इस्तेमाल को भी कम करने में सहायता होगी।  उन्होंने कहा कि एक प्रभावी नेज़ल डोज़ ना केवल कोविड-19 से सुरक्षा देगा, बल्कि इससे लोगों में एक अलग तरह की इम्यूनिटी तैयार होगी जो,  संक्रमण को दूसरों तक फैलने से भी रोकेगा।