
... Read More
Written By: Atul Modi | Updated : January 24, 2021 2:48 PM IST
प्रयोग के लिए सुरक्षित है भारत बायोटेक की Covaxin, लैंसेट स्टडी ने वैक्सीन पर जताया भरोसा
भारत बायोटेक वैक्सीन (Bharat Biotech Covaxin) बनाने वाली कंपनी, पहली भारतीय कंपनी बन गई है जिसकी वैक्सीन को प्रयोग करने की इजाजत मिली है व जो सुरक्षित भी है। इस वैक्सीन में लैंसेट स्टडीज (Lancet Studies) के मुताबिक सुरक्षा पाई गई है व यह हमारे इम्यून सिस्टम के रेस्पॉन्स को भी बढ़ावा देती है। दोनो ही फार्मूले फेज टू के ट्रॉयल के लिए चुने गए हैं।
इस वैक्सीन में भारत बायोटेक ने Algel-IMDG नामक तत्व का प्रयोग किया है। ताकि इसके माध्यम से यह हमारे इम्यून सिस्टम को एक अच्छा रेस्पॉन्स दे सके। भारत बायोटेक ने फेज 1 व 2 का डेटा एक प्री प्रिंट के माध्यम से शेयर किया था, जोकि एक नॉन पीयर प्रिव्यूड रिसर्च का नतीजा था।
फेज 1 के ट्रॉयल के दौरान 375 प्रतिभागियों के अनुसार यह पाया गया कि कोवैक्सीन (Covaxin) वायरस के खिलाफ हमारे शरीर में एंटी बॉडीज को बाइंड करती है। इसमें Algel-IMDG का समावेश इसे पहली इनेक्टिवेटेड वैक्सीन बनाता है जो T-Cell रेस्पॉन्स देती है।
एंटी बॉडीज हमारे खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो हमारी सेल्स में होने वाले इंफेक्शन से हमें बचाता है। जबकि T-Cell हमारे शरीर की दूसरी परत में पाया जाने वाला एक हिस्सा है, जो हमारे इम्यून सिस्टम को इंफेक्शन से बचाता है।
वैक्सीन की दो डोज, फेज 1 के दौरान 14 दिनों के अंदर दी गई। इनका गहनता से विश्लेषण पहली डोज के लगभग 42 दिनों बाद किया गया। दूसरे चरण में दवा देने की यह प्रक्रिया 28 दिन में बदल गई।
दवाई का पहला डोज देने के लगभग 5 दिन बाद इसका एक गंभीर उल्टा असर यानी साइड इफेक्ट देखने को मिला जो बाद में इस नतीजे पर पहुंचा की यह साइड इफेक्ट वैक्सीन से जुड़ा हुआ नहीं था।
लगभग 82-92% प्रतिभागियों में तीसरी वैक्सीन लेते समय एंटी बॉडीज का निर्माण दिखने लगा। यह दूसरी डोज के बाद देखने को मिला। इस दौरान दूसरे फेस की स्टडी की गई।
दूसरे चरण के नतीजों के मुताबिक जोकि पिछले महीने ही सामने आए हैं, अब प्रतिभागियों में एंटी बॉडीज के साथ साथ टी सेल्स भी देखने को मिलने लगी। इस चरण के नतीजे अभी तक पब्लिश नहीं किए गए हैं।
भारत बायोटेक की यह वैक्सीन फिलहाल तीसरे चरण से गुजर रही है। इस दौरान यह 26000 प्रतिभागियों के साथ काम कर रहीं है ताकि इस वैक्सीन के प्रभाव को और अच्छे प्रकार से जाना जा सके।
यह वैक्सीन शुरू से ही विवादास्पद रही है क्योंकि इसे इमरजेंसी के दौरान प्रयोग करने का लाइसेंस मिल चुका था। इस वैक्सीन के तीसरे चरण का डेटा अभी प्रकाशित नहीं किया गया है इसलिए बहुत से एक्सपर्ट्स ने इस वैक्सीन का जम कर विरोध भी किया है।
बता दें कि भारत बायोटेक भारत की केवल एक ही ऐसी कंपनी है जिसने अपना कोई डेटा पब्लिश भी किया है। अन्य कंपनी जिन्हें इमरजेंसी के दौरान वैक्सीन प्रयोग करने का लाइसेंसी मिला है जैसे सीरम इंस्टीट्यूट आदि ने अभी तक कोई भी डेटा प्रकाशित नहीं किया है। हालांकि इस वैक्सीन का भी तीसरे चरण का परीक्षण अभी जारी है।