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Written By: Anshumala | Published : September 29, 2021 3:20 PM IST
Covaxin News: भारत बायोटेक की कोवैक्सीन उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज, डब्लूएचओ से इमरजेंसी यूज के लिए नहीं मिली मंजूरी
Covaxin Latest News: हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी (Bharat Biotech) द्वारा निर्मित कोवैक्सीन (Covaxin) को कोरोनावायरस के खिलाफ टीकाकरण (Vaccination) में प्रमुख भूमिका निभानी थी, लेकिन देश भर में जनवरी 2021 से शुरू हुए कोरोना ट्राइव के 8 महीने बाद भी 11 भारतीयों में से सिर्फ 1 ही व्यक्ति इस स्वदेशी (कोवैक्सीन) वैक्सीन की पहली खुराक प्राप्त करने में कामयाब रहा है। भारत बायोटेक इस वैक्सीन को बनाने में पूरी तरह से असफल साबित हुई है। इस कंपनी ने अपने लिए जो वैक्सीन निर्माण का लक्ष्य तय किया था, उसमें लगातार असफल साबित हुई है। देश में कोवैक्सीन (Covaxin News) की भारी मात्रा में शॉर्टेज है। इतना ही नहीं, इस वैक्सीन के एक बैच को गुणवत्ता के मुद्दों (Quality Issues) का सामना भी करना पड़ा है।
हाल ही में कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा एल्ला ने कहा था कि कंपनी अक्टूबर महीने से लगभग 5.5 करोड़ कोरोना की खुराकों की आपू्र्ति (Supply) करेगी। इससे पहले कंपनी ने 10 करोड़ आपूर्ति करने की बात कही थी। मई में सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किए गए एफिडेविट में केंद्र ने कौवैक्सीन की 55 करोड़ डोजेज (प्रत्येक महीने औसतन 10 करोड़ डोजेज) अगस्त से लेकर दिसंबर तक उपलब्ध होने की बात कही थी। एक ही महीने बाद, इसे 20 प्रतिशत तक घटाकर 8 करोड़ कर दिया गया। अगस्त और सितंबर में कोवैक्सीन की उपब्धता में भारी कमी आई है।
ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि क्या भारत बायोटेक कंपनी ने कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxin Latest News in Hindi) की जितनी संख्या में निर्माण की बात कही थी, उसमें असफल हुआ है? क्या कंपनी के पास इतनी क्षमता नहीं है कि वे वैक्सीन का निर्माण और आपूर्ति कर सके? कंपनी और सरकार द्वारा जो कोवैक्सीन निर्माण और आपूर्ति की अनुमानित क्षमता के बारे में बात कही गई थी, उसमें भारी फर्क है। पिछले कुछ महीनों से कंपनी और केंद्र द्वारा वैक्सीन से संबंधित जारी आंकड़ों में भारी अंतर है और इसके उत्पादन के बारे में भी कोई स्पष्टता नहीं है।
भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को डब्लूएचओ की तरफ से आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी नहीं मिली है। कंपनी को कुछ टेक्निकल सवालों का जवाब देना होगा। जब तक डब्लूएचओ की तरफ से कोवैक्सीन को मंजूरी नहीं मिलेगी, विश्व भर में इसे स्वीकृत वैक्सीन नहीं माना जाएगा।