गम्भीर कोविड से अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों को हो सकता है डिप्रेशन, स्टडी का दावा

लैसेंट में प्रकाशित एक नयी स्टडी के अनुसार, कोविड से अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों में डिप्रेशन की संभावना अधिक देखी गयी।

WrittenBy

Written By: Sadhna Tiwari | Updated : March 15, 2022 7:17 PM IST

Mental Health Problems Post Covid: कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के 7 दिन या उससे ज्यादा समय तक बेड पर रहने वाले लोगों में अवसाद और चिंता की दर उन लोगों की तुलना में ज्यादा है, जो कोरोना संक्रमित हुए, लेकिन उन्होंने कभी बेड का सहारा नहीं लिया। ये जानकारी द लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक नए अध्ययन से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वायरस सार्स-सीओवी-2 से संक्रमित व्यक्ति जो कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए, वे रिकवर होने के बाद 16 महीने तक अवसाद में रहे। ये उन लोगों की तुलना में ज्यादा है जो कभी संक्रमित नहीं हुए। (Mental Health Problems Post Covid In Hindi)

जबकि अस्पताल में भर्ती नहीं हुए मरीजों के लिए अवसाद और चिंता के लक्षण ज्यादातर दो महीने के अंदर कम हो जाते हैं, जबकि 7 दिनों या उससे ज्यादा समय तक बेड पर रहने वालों में 16 महीने तक अवसाद और चिंता का अनुभव होने की संभावना 50-60 प्रतिशत ज्यादा होती है।

कोविड के बाद डिप्रेशन का रिस्क अधिक

शरीर में कोरोना के लक्षणों की त्वरित रिकवरी आंशिक रूप से समझा सकती है कि हल्के संक्रमण वाले लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण समान दर से क्यों घटते हैं। हालांकि, गंभीर कोरोना वाले मरीजों में अक्सर सूजन की संभावना होती हैं जो पहले भी मानसिक स्वास्थ्य प्रभावों खासकर अवसाद से जुड़ा हुआ है।

आइसलैंड विश्वविद्यालय से इंगिबजॉर्ग मैग्नसडॉटिर ने कहा, "कोरोना के मरीजों में अवसाद और चिंता की समस्या उनमें ज्यादा होती है, जिन्होंने सात दिन या उससे अधिक समय बेड पर बिताया हो।"

  • लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्यप्रभावों को देखने के लिए शोधकर्ताओं ने 0-16 महीनों से कोरोना ठीक होने के साथ और बिना लोगों में अवसाद, चिंता, कोरोना संबंधित परेशनी और खराब नींद की गुणवत्ता के लक्षण फैलते हुए देखा।
  • ये विश्लेषण डेनमार्क, एस्टोनिया, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूके में 7 समूहों में 247,249 लोगों से इक्ठ्ठा किया गया।
  • कोरोना से ठीक होने वाले लोगों में उन व्यक्तियों की तुलना में अवसाद और खराब नींद की गुणवत्ता का अधिक है, जो कभी जांच नहीं हुई।

महामारी के दौरान हुई मानसिक बीमारियों में बढ़ोतरी

ससस्टडी से जुड़े एक्सपर्ट और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर उन्नूर अन्ना वाल्दीमार्सडॉटिर ने कहा, "हमारा शोध निदान के 16 महीने बाद तक सामान्य आबादी में एक गंभीर कोरोना बीमारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों का पता लगाने वाला पहला शोध है। यह बताता है कि मानसिक स्वास्थ्य प्रभाव सभी कोरोना रोगियों के लिए समान नहीं हैं और बेड पर बिताया गया समय मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की गंभीरता को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण कारक है।"

"हम महामारी के तीसरे साल में प्रवेश कर रहे हैं। कोरोना की गंभीर बीमारी वाले रोगियों के अनुपात में प्रतिकूल मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि हुई है और संक्रमण के बाद पहले साल से आगे अनुवर्ती अध्ययन देखभाल के लिए समय पर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।"

(आईएएनएस)

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source