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Bacterial Diseases During Lockdown: लॉकडाउन में कोरोना के अलावा कम हुए बैक्टेरियल इंफेक्शन्स भी, लैंसेट पत्रिका का दावा

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की अगुवाई में की गयी इस स्टडी में दावा किया गया है कि, लॉकडाउन से कोरोना वायरस के अलावा निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और सेप्सिस जैसी कई ऐसी बीमारियों के मामले भी कम हुए हैं जो आक्रामक बैक्टीरिया के कारण होते हैं। (Bacterial Diseases during lockdown)

Bacterial Diseases During Lockdown: लॉकडाउन में कोरोना के अलावा कम हुए बैक्टेरियल इंफेक्शन्स भी, लैंसेट पत्रिका का दावा

Written by Sadhna Tiwari |Published : May 28, 2021 9:32 PM IST

Bacterial Diseases during lockdown: कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए दुनियाभर के विभिन्न देशों ने अपने क्षेत्र में लॉकडाउन लगाने का फैसला किया। इससे लोगों के बीच शारीरिक सम्पर्क कम होने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में आसानी हुई। कई जगहों पर लॉकडाउन का बहुत व्यापक फायदा दिखा और नतीजतन कोविड केसेस में कमी भी देखने को मिली। वहीं, बैक्टेरिया का प्रसार कम होने के कारण  लाखों लोगों की जान बचाने में भी मदद हुई।  इस बात का दावा किया है एक ताज़ा स्टडी में जिसे शुक्रवार को मशहूर जर्नल ‘द लैंसेट डिजिटल हेल्थ’  में प्रकाशित किया गया। (Bacterial Diseases spread during lockdown in Hindi)

कोरोना काल में कम हुईं बैक्टेरियल डिज़िज़ेज़

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की अगुवाई में की गयी इस स्टडी में दावा किया गया है कि, लॉकडाउन से कोरोना वायरस के अलावा निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और सेप्सिस जैसी कई ऐसी बीमारियों के मामले भी कम हुए हैं जो आक्रामक बैक्टीरिया के कारण होते हैं। गौरतलब है कि संक्रामक बैक्टेरिया की वजह से होने वाली ये बीमारियां दुनियाभर में वयस्कों और बच्चों में मृत्युदर की बड़ी वजह है। इन बैक्टेरिया का प्रसार सांस के माध्यम एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में होता है। स्टडी में कहा गया है कि, कोविड-19 का प्रसार को रोकने की दिशा में लॉकडाउन जैसे नियमों से फायदा होता है।इस स्टडी के अनुसार

  • सभी देशों ने पिछले दो सालों की तुलना में जनवरी और मई 2020 के बीच आक्रामक जीवाणु संक्रमण (Bacterial Diseases) में उल्लेखनीय और निरंतर कमी देखी है ।  जो कि, उम्मीद से लगभग 6,000 कम मामले हैं।
  • स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया के लिए, कोविड -19 रोकथाम उपायों के लागू होने के बाद चार सप्ताह में संक्रमण में 68 प्रतिशत की कमी आई और आठ सप्ताह में 82 प्रतिशत की कमी आई।

वैक्सीनेशन पर ज़ोर देना आवश्यक

संक्रामक रोग महामारी विज्ञान की प्रोफेसर, जनसंख्या स्वास्थ्य के नफिल्ड विभाग की मशहूर लेखक एंजेला ब्रूगेमैन ने कहा, "ये परिणाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं कि कोविड -19 रोकथाम के उपाय अन्य श्वसन रोगजनकों और संबंधित बीमारियों के संचरण को कम करते हैं, लेकिन वे समाज पर एक भारी बोझ भी डालते हैं जिस पर सावधानीपूर्वक विचार किया जाना चाहिए। इसलिए, चल रही सूक्ष्मजीवविज्ञानी निगरानी जैसा कि इस अध्ययन में दिखाया गया है आवश्यक है।"

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उन्होंने कहा, "सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों को इन जीवाणु रोगजनकों के कारण होने वाली जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए सुरक्षित और प्रभावी टीकों को लागू करने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो पहले से ही उपलब्ध हैं और दुनिया के कई हिस्सों में उपयोग किए जा रहे हैं।"

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अध्ययन के लिए, टीम ने पिछले सालों की दरों के साथ कोविड -19 महामारी के दौरान तीन बैक्टीरिया, स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा और निसेरिया मेनिंगिटिडिस के लिए रिपोर्ट किए गए संक्रमणों की संख्या की तुलना की। साथ में, ये जीवाणु प्रजातियां मेनिन्जाइटिस, निमोनिया और सेप्सिस के सबसे आम कारण हैं। 6 महाद्वीपों में फैले 26 देशों और क्षेत्रों से राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और निगरानी कार्यक्रमों से डेटा प्राप्त किया गया था।