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केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार पुरजोर कोशिश कर रही है। आयुष्मान भारत को और अधिक व्यापक रूप देने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत सभी चिकित्सा सुविधाओं और डॉक्टरों का डिजिटल पंजीकरण शुरू कर दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरी योजना और नए दिशा-निर्देश।
केंद्र सरकार द्वारा जारी एक पत्र में सभी राज्य सचिव और स्वास्थ्य मिशन के निदेशकों को ये निर्देश दिया गया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी सभी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मिशन में भाग लेना अनिवार्य कर दिया है।
सभी राज्य सचिवों को लिखे गए पत्र में ये कहा गया है, "तदनुसार, सभी स्वास्थ्य सुविधाएं जैसे अस्पताल, क्लीनिक, प्रयोगशालाएं, फार्मेसियां, रेडियोलॉजी केंद्र आदि, जहां कोई स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की जाती है, से अनुरोध किया जाता है कि वे डिजिटल मिशन के लिए पंजीकरण करें।"
स्वास्थ्य रिकॉर्ड मिशन के डिजिटलीकरण के तहत, सरकारी अस्पतालों को अस्पताल सूचना प्रबंधन प्रणाली सॉफ्टवेयर खरीदने की सलाह दी गई है।
केंद्र ने अस्पतालों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए दो समाधान भी उपलब्ध कराए हैं, जिसमें एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना केंद्र) द्वारा ई-अस्पताल और उन्नत कंप्यूटिंग के विकास के लिए केंद्र (सी-डैक) शामिल हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरूआत की थी। मिशन के तहत, प्रत्येक भारतीय को एक विशिष्ट स्वास्थ्य आईडी मिलेगी जो एक स्वास्थ्य खाते के रूप में भी काम करेगी जिससे व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड को जोड़ा जा सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने 25 सितंबर को आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर आरोग्य मंथन 3.0 का उद्घाटन करते हुए कहा था, "प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने भारत की संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार किया है। मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि इस योजना ने पिछले तीन वर्षों में 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सेवा की है।"
राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) को इस पहल को लागू करने का काम सौंपा गया है।