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Written By: akhilesh dwivedi | Published : October 28, 2018 9:03 PM IST
सर्पगंधा आयुर्वेदिक दवा। © Shutterstock
सर्पगंधा एक ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी है जो इंसान को सर्प के काटने के बाद भी बचा सकती है। आयुर्वेद में इसका उपयोग कई तरह की लाइलाज बीमारियों में किये जाने का उल्लेख मिलता है। सर्पगंधा अपने नाम से ही सर्प के बारे में बताती है इसका उपयोग कई तरह के विषैले जीवों के काटने पर इलाज के तौर पर किया जाता है। इसके उपयोग से इंसान को नींद न आने की समस्या से भी इजाद मिल सकती है। सर्पगंधा का उपयोग कई तरह की दवाओं को बनाने में भी किया जाता है। सर्पगंधा के उपयोग से अनिंद्रा अर्थात नींद न आने की समस्या, हिस्टीरिया और मानसिक तनाव को दूर करने में भी किया जाता है।
कैसे पहचान करें ?
सर्पगन्धा के पौधे की ऊंचाई 6 इंच से 2 फुट तक होती है। इसकी प्रधान मुख्य जड़ प्राय: 20 से. मी. तक लम्बी होती है। जड़ में कोई शाखा नहीं होती है। सर्पगन्धा की पत्ती एक सरल पत्ती का उदाहरण है। इसका तना मोटी छाल से ढका रहता है। इसके फूल गुलाबी या सफेद रंग के होते हैं।
कैसे उपयोग करें ?
इसकी जड़ भी बहुत उपयोगी मानी जाती है। जिन लोगों को अनिद्रा की समस्या होती है, उनके लिए तो ये जड़ी वरदान है। यदि इसकी जड़ के चूर्ण का सेवन करना चाहें तो इसकी जड़ को खूब बारीक पीसकर कपड़े से छानकर महीन पावडर बना लें। अनिद्रा दूर कर नींद लाने के लिए इसे 2 ग्राम मात्रा में सोने से घण्टेभर पहले ठण्डे पानी के साथ ले लेना चाहिए।
क्या बरते सावधानी ?
यही मात्रा मानसिक उत्तेजना व उन्माद को शान्त करने के लिए सेवन योग्य है। इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए और बहुत कमजोर शरीर वाले व्यक्ति को भी इसका सेवन किसी वैद्य से परामर्श करके ही करना चाहिए।