Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आयुष मंत्रालय के आयुर्वेदिक आहार उत्पाद को लेकर नियमावली जारी कर दी है। इसके तहत अब आयुर्वेदिक आहार उत्पाद फूड सेफ्टी के दायरे में आएंगे। इसके लिए विभाग से लाइसेंस लेना होगा। अब आयुर्वेदिक आहार को निर्माता और विक्रेता आयुर्वेदिक दवा के रूप में नहीं बेच सकेंगे। वहीं नियमावली का पालन न करने पर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयुर्वेदिक आहार उत्पादों का निर्माण और विपणन सुरक्षा और मानक विनियम, 2022 नियमाें के अनुसार किया जाएगा। वहीं इसमें आयुर्वेदिक दवाएं, मालिकाना आयुर्वेदिक दवाएं और औषधीय उत्पाद, सौंदर्य प्रसाधन, मादक और मनोदैहिक पदार्थ के साथ जड़ी बूटियां शामिल नहीं होंगी।
मालूम हो कि कई आयुर्वेदिक आहार उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। कोरोना महामारी के बाद से तो देश के विभिन्न राज्यों में बाजारों में आयुर्वेदिक दवा के नाम से आयुर्वेदिक आहार उत्पादों की बाढ़ सी आ गई है। इनमें देशी और विदेशी हजारों कंपनियां आयुर्वेद उत्पाद का निर्माण कर रही हैं और बिना किसी लाइसेंस के बाजार में उपलब्ध करा रही हैं। वहीं इन उत्पादों का कोई स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने पर लोग इसका सेवन करने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि बाजार में आयुर्वेदिक आहार उत्पादों की भरमार हो गई है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने आयुर्वेदिक आहार उत्पाद को सर्टिफाइड करने के लिए नियमावली जारी कर दी है ताकि इसका लोगों पर विश्वास और बढ़ सके। नियमावली को लेकर विभाग का मुख्य उद्देश्य इन उत्पादों को और बेहतर तरीके से लैब में टेस्ट करके ही बाजार में उतारने का है।
वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी डी.के.वर्मा ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि अब आयुर्वेदिक आहार निर्माता और विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए आयुर्वेदिक औषधियों से अलग आयुर्वेदिक खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर एफएसएसआई का लोगो लगाना अनिवार्य होगा। वहीं समय-समय पर खाद्य सुरक्षा विभाग आयुर्वेदिक उत्पादों की जांच करेगा। जांच के दौरान निर्धारित मापदंड पर उत्पाद खरा न होने पर निर्माता और विक्रेता कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर भारत सरकार की ओर से दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।