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ग्रामीण इलाकों में सैनेटरी नैपकिन के प्रति जागरूकता अभी भी कम : अरुणाचलम मुरुगनाथम

मुरुगनाथम का कहना है कि अपने मिशन को पूरा करने के लिए अभी और लंबा सफर तय करना बाकी है, ताकि माहवारी स्वच्छता सभी को किफायती और सुलभ रूप में हासिल हो सके।

युवा महिलाओं से जब उसने सैनिटरी पैड के बारे में सवाल पूछना शुरू किया तो कुछ ने उसे पागल सोचा और कुछ ने समाज को बिगाड़ने वाला। लेकिन अरुणाचलम मुरुगनाथम ने यह सब अपनी पत्नी के लिए सस्ते सैनिटरी नैपकिन बनाने की अपनी तलाश के लिए किया, जिसने आखिरकार विश्व भर में ग्रामीण महिलाओं के माहवारी स्वास्थ्य में क्रांतिकारी परिवर्तन ला खड़ा किया।

तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले मुरुगनाथम का कहना है कि अपने मिशन को पूरा करने के लिए अभी और लंबा सफर तय करना बाकी है, ताकि माहवारी स्वच्छता सभी को किफायती और सुलभ रूप में हासिल हो सके।

मुरुगनाथम का कहना है कि यह सब मेरी पत्नी शांति के साथ शुरू हुआ और पूरी दुनिया में फैल गया। इसने एक क्रांति को जन्म दिया। मुझे खुशी है कि मेरा मिशन लोगों तक पहुंचा।

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उन्होंने कहा, "लोग वास्तव में बदल गए हैं। सैनेटरी स्वच्छता के बारे में अब अधिक लोग खुलकर बातें किया करते हैं। 20 साल पहले लोग इसके बारे में बात करने से भी डरते थे। आज वह भ्रम टूट गया है, लेकिन भारत केवल मेट्रो शहरों से नहीं बना। हमारे देश में छह लाख गांव हैं और जागरूकता का स्तर बहुत कम है। सभी के लिए माहवारी स्वच्छता किफायती और सुलभ बनाने के हमारे मिशन को अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति पैडमैन बन सकता है, इसलिए मुझे लगता है कि ज्यादा से ज्यादा पैडमैन बनाना मेरी जिम्मेदारी है।"

उन्होंने प्रसिद्धि और प्रशंसा पाने के लिए अपने इस सफर की शुरुआत नहीं की थी, बल्कि वह चाहते थे कि उनकी पत्नी को उस महीने के दौरान रुई, राख और कपड़े के टुकड़े जैसे गंदे तरीकों का न अपनाना पड़े।

स्कूल छोड़ने वाले मुरुगनाथम ने करीब-करीब अपना परिवार, अपना पैसा और समाज में इज्जत खो दी थी। लोगों ने उन्हें नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। वह अपने पड़ोस के लोगों के तानों का विषय बन गए और कुछ ने सोचा कि वह यौन रोग से ग्रस्त हैं। यहां तक कि उनकी पत्नी ने भी किफायती सैनेटरी नैपकिन बनाने की उनकी सनक के कारण उन्हें छोड़ दिया था।

वर्तमान में वह कोयंबटूर में महिलाओं को सैनेटरी पैड की आपूर्ति करने के लिए एक कंपनी चला रहे हैं। साथ ही कई देशों में अपने कम लागत वाले स्वच्छता उत्पादों के लिए प्रौद्योगिकी प्रदान कर रहे हैं। टाइम मैगजीन ने 2014 में उन्हें 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में स्थान दिया था। साथ ही 2016 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

उनकी कहानी को अभिनेता अक्षय कुमार ने फिल्म 'पैडमैन' के माध्यम से एक अलग ढंग से पर्दे पर अपनी स्टार पावर के साथ पेश किया। उन्होंने कहा, "यह पहली बार था जब कोई सुपरस्टार माहवारी स्वच्छता पर फिल्म करने के लिए आगे आया।

उन्होंने कहा, "हमने जमीनी स्तर और डिजिटली माहवारी स्वच्छता पर जागरूकता फैलाने के मकसद से ''स्टैंडबाईहर'' की पहल शुरू की है। हमने कुछ दिमाग वाले लोगों की मदद से स्कूली छात्रों और ग्रामीणों के बीच जागरूकता फैलाई है। महावारी स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हम एक बहुभाषी गाना भी निकालने वाले हैं।"

स्रोत:IANS Hindi.

चित्रस्रोत- Twitter/UN Women.

 

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