हेल्थ की खास मुहिम के कारण सिडनी टेस्ट क्रिकेट के तीसरे दिन सबकुछ होगा पिंक

ऑस्ट्रेलिया में पिंक टेस्ट खेलने की शुरूआत के पीछे हेल्थ की एक विशेष मुहिम है। मैदान में सब कुछ पिंक होने का कारण आपको जरूर जानना चाहिए।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : January 4, 2019 7:34 PM IST

इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट सीरीज में एक दिन ऐसा भी आएगा जब मैदान में सबकुछ पिंक नजर आयेगा। ऑस्ट्रेलिया में पिंक टेस्ट खेलने की शुरूआत के पीछे हेल्थ की एक विशेष मुहिम है। मैदान में सब कुछ पिंक होने का कारण आपको जरूर जानना चाहिए।

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पिंक टेस्ट क्या है ? 

सिडनी में पिंक टेस्ट पहली बार 2009 में खेला गया था। पहली बार ये टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया था। इसके बाद से ही यह मुहिम लगातार चलती आ रही है।

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अब तक 10 पिंक टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं और इस बार भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जा रहा सिडनी टेस्ट 11वां पिंक टेस्ट मैच है।

‘पिंक टेस्‍ट’ के तीसरे दिन को ‘जेन मैक्ग्रा डे’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन फैंस अपना इस मुहिम के प्रति अपना समर्थन दिखाने के लिए गुलाबी रंग की ड्रेस पहनते हैं। इस टेस्ट से जुटाई गई राशि को मैक्ग्रा फाउंडेशन को दिया जाता है

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ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा की पत्‍नी जेन मैक्ग्रा की मौत स्तन कैंसर से हुई थी। इस टेस्ट मैच से जुटाई गई राशि को ग्लेन मैक्ग्रा फाउंडेशन को दिया जाता है।

हेल्थ की कौन सी मुहिम है पिंक टेस्ट ?

ग्लेन मैक्ग्रा फाउंडेशन एक ऐसी संस्था है जो ऑस्ट्रेलिया में स्तन कैंसर के प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ-साथ शिक्षा के लिए भी काम करती है।

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ये संस्था देशभर ब्रेस्ट केयर नर्सो को रखने के लिए पैसा जुटाती है और लोगों में इस बीमारी के बारे में जागरुकता भी बढ़ाती है। इस फाउंडेशन की शुरूआत 2005 में हुई थी।

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पेसर ग्लेन मैकग्रा पत्नी जेन ने स्तन कैंसर से उबरने के बाद इस फाउंडेशन और मुहिम की शुरूआत की थी। तीन साल बाद जेन का निधन हो गया और अगले वर्ष से पिंक टेस्ट से ये मैच जाना जाने लगा।

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गौरतलब है ब्रेस्ट कैंसर को लेकर महिलाओं में अगर जागरूकता हो तो इसे खतरनाक स्थिति में आने से पहले ही पहचाना जा सकता है और महिला की जान बचायी जा सकती है।

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