
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : December 23, 2024 10:31 PM IST
एटोपिक डर्मेटाइटिस एक प्रकार का त्वचा रोग है और इस बीमारी को मामूली नहीं समझा जा सकता है। दरअसल, आज ही जारी की गयी एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि, आनेवाले कुछ वर्षों में एटोपिक डर्मेटाइटिस की बीमारी कई गुना बढ़ जाएगी और साल 20233 तक 42.42 मिलियन लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके होंगे। डेटा और एनालिटिक्स कंपनी ग्लोबलडाटा की रिपोर्ट से पता चला है कि बीते 12 महीनों में दुनियाभर में एटोपिक डर्माटाइटिस के जो केसेस सामने आए हैं उनको ध्यान में रखते हुए यह अनुमान है कि, साल 2033 में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 42.42 मिलियन तक पहुंच सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2023 में एटोपिक डर्माटाइटिस कुल 42.02 मिलियन मामले सामने आए। वहीं, अगले एक दशक में इस बीमारी के फैलने की दर 0.10 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर देखी जा सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एटोपिक डर्माटाइटिस के सबसे अधिक मामले (Cases of Atopic Dermatitis) अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, यूके और जापान जैसे देशों में देखे जा सकते हैं।
एटोपिक डर्मेटाइटिस को एक्जिमा (Eczema) के नाम से भी जाना जाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि एटोपिक डर्माटाइटिस के मामले पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े कारणों से बढ़ सकते हैं। आनेवाले समय में लोगों की लाइफस्टाइल और पर्यावरण से जुड़े कारणों से वयस्कों में एटोपिक डर्माटाइटिस की स्थिति देखी जा सकती है। एटोपिक डर्मेटाइटिस में इस तरह के लक्षण (Symptoms of Atopic Dermatitis) दिखायी देते हैं-
ग्लोबलडाटा के महामारी विज्ञानी यिक्सुआन झांग ने कहा, "एटोपिक डर्मेटाइटिस या अल्सरगिक स्किन डिजिज कैसे होता है इसके सटीक कारण अभी पता नहीं चल सके हैं। हालांकि, यह कहा जा सकता है कि यह बीमारी जेनेटिक्स (Genetics), पर्यावरणीय और जीवन शैली संबंधी कारणों से हो सकती है।"
ग्लोबलडाटा पैंडेमिक एक्सपर्ट्स के अनुसार, साल 2023 में सात प्रमुख क्षेत्रों में एटोपिक डर्माटाइटिस के साधारण ( हल्के और 12 महीने के इलाज से ठीक होने वाले) मामलों की संख्या रही 44 प्रतिशत, जबकि, एटोपिक डर्माटाइटिस के मध्यम स्तर की गम्भीरता वाले मामलों 42 प्रतिशत और एटोपिक डर्माटाइटिस के गंभीर मामलों (Serious cases of Atopic Dermatitis) की संख्या लगभग 14 प्रतिशत रही।
एटोपिक डर्माटाइटिस ना केवल जटिल बीमारी है, बल्कि यह मेंटल हेल्थ से भी जुड़ी हुई है। इस बीमारी में मरीज की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं। जहां बहुत गंभीर मामलों में एटोपिक डर्माटाइटिस के चलते नींद से जुड़ी बीमारियां (sleeping disorders) और डिसॉर्डर्स बढ़ सकते हैं। वहीं, स्किन पर रैशेज, खुजली और लालिमा जैसे लक्षण डिप्रेशन (depression) और एंग्जायटी या स्ट्रेस से भी जुड़े हुए हो सकते हैं। जनाकरों के अनुसार, एक्जिमा के लक्षण बचपन (Atopic Dermatitis or eczema symptoms in kids) में ही दिखायी दे सकते हैं।
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