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कोरोना पॉजीटिव लेकिन लक्षण न दिखने पर फेफड़े हो सकते हैं अचानक डैमेज
कोरोनावायरस पिछले कुछ समय से जिस गति से दुनियाभर में अपने पैर पसार रहा है उससे सभी बड़े डॉक्टर्स, शोधकर्ता और यहां तक की विश्व स्वास्थ्य संगठन तक चकित है। लाखों की संख्या में लोग कोरोनावायरस के चलते मारे जा चुके हैं लेकिन अब तक इसका इलाज नहीं मिला है। तमाम एक्सपर्ट्स को इलाज ढूंढने में इसलिए भी परेशानी आ रही है क्योंकि इस वायरस के कोई निश्चित लक्षण नहीं है। पिछले 8-9 महीने से इसके लक्षणों में लगातार बदलाव हो रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनको कोरोना टेस्ट तो पॉजीटिव है लेकिन उनके अंदर किसी भी तरह के लक्षण नहीं दिख रहे हैं।
जिन लोगों में कोरोनावायरस के लक्षण नहीं दिख रहे हैं लेकिन रिपोर्ट पॉजीटिव है वह खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं क्योंकि उन्हें न तो आक्रामक उपचार से गुजरना पड़ रहा है और न ही अस्पतालों में एडमिट होना पड़ रहा है। लेकिन ऐसे लोगों को ज्यादा खतरा है। हाल ही में आई एक स्टडी में कहा गया है कि जिन लोगों का कोरोना टेस्ट पॉजीटिव आ रहा है लेकिन कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं उन्हें फेफड़ों के डैमेज होने का खतरा है। साथ ही ऐसे लोगों की अचानक मौत भी हो सकती है।
चीन के वुहान शहर में हुए अध्ययन में कहा गया है कि सीटी स्कैन और फेफड़ों की जांच करने के बाद पाया गया है कि जिन लोगों में COVID-19 के लक्षण दिख रहे थे उनकी तुलना में जो लोग लक्षणहीन थे उनकी रिपोर्ट ज्यादा निराशाजनक आई है। रिपोर्ट में पॉजीटिव लेकिन लक्षण न दिखने वाले मरीजों के फेफड़ों में सूजन पाई गई है। इसके बावजूद ऐसे लोगों में न ही सांस की तकलीफ देखी गई और न ही किसी तरह के निमोनिया के लक्षण देखे गए।
अध्ययन में केवल एक चौथाई रोगियों में बुखार या खांसी जैसे हल्के लक्षण दिखाई दिए। एक और सवाल जो अध्ययन पूछता है कि क्यों और कैसे वायरस कुछ ही लोगों को प्रभावित करता है, या कुछ लोगों में लक्षणों का कारण बनता है। स्टडी में कहा गया है कि आखिर कैसे एक ही जगह के दो लोग जिनका स्वास्थ्य समान है उनमें कोरोना के अलग अलग लक्षणों का अनुभव करते हैं। ऐसे लोग सिर्फ इलाज से ही अछूते नहीं रहते हैं बल्कि इन्हें फेफड़ों के डैमेज होने और अचानक मौत का भी खतरा हो सकता है।