तीसरे फेज़ में पहुंचा एस्ट्राजेनेका का ट्रायल, जल्द लॉन्च हो सकती है अमेरिकी वैक्सीन

एक ओर जहां कोरोनावायरस दुनियाभर में कहर ढा रहा है वहीं दूसरी ओर तमाम वैज्ञानिक और डॉक्टर इसका इलाज ढूंढने में लगे हैं। आए दिन अलग अलग देश कोरोना वैक्सनी के करीब पहुंचने का दावा करते हैं। रूस और भारत के बाद अब अमेरिका भी आगे आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) का ट्रायल तीसरे फेज़ में पहुंच चुका है। अगर सब प्लॉनिंग के हिसाब से हुआ तो एस्ट्राजेनेका वैक्सीन जल्द लॉन्च हो सकती है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : September 2, 2020 9:31 AM IST

एक ओर जहां कोरोनावायरस दुनियाभर में कहर ढा रहा है वहीं दूसरी ओर तमाम वैज्ञानिक और डॉक्टर इसका इलाज ढूंढने में लगे हैं। आए दिन अलग अलग देश कोरोना वैक्सनी के करीब पहुंचने का दावा करते हैं। रूस और भारत के बाद अब अमेरिका भी आगे आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) का ट्रायल तीसरे फेज़ में पहुंच चुका है। अगर सब प्लॉनिंग के हिसाब से हुआ तो एस्ट्राजेनेका वैक्सीन जल्द लॉन्च हो सकती है।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों व फाइजर के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार कर रही एस्ट्राजेनेका ने कहा कि वैक्सीन के फेज-3 के ट्रायल में करीब 30 हजार वॉलंटियरों को शामिल किया गया है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वैक्सीन बनाने के बहुत करीब पहुंच चुका है और यह बताते हुए हमें बेहद खुशी है कि एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन फेज-3 के ट्रायल में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कोरोना के खिलाफ वैक्सीन बनाकर इस खतरनाक वायरस को हराकर रहेगा। अमेरिका में ट्रंप सरकार द्वारा वैक्सीन को जल्द से जल्द तैयार करने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए 'ऑपरेशन वार्प स्पीड' चलाया जा रहा है।

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बता दें कि, कोरोना वायरस की इस वैक्सीन को ChAdOx1 वायरस से बनाया गया है। यह एक सामान्य कोल्ड वायरस (एडेनोवायरस) का कमजोर वर्जन है। यह वायरस चिंपांजी में संक्रमण का कारण बनता है। इस वायरस को आनुवंशिक रूप से बदल दिया गया है। इस कारण यह इंसानों में संक्रमण का कारण नहीं बन सकता है। ऑक्सफोर्ड के प्रमुख प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने इस बारे में कहा, “क्लीनिकल ​​अध्ययन बहुत अच्छी तरह से प्रगति कर रहा हैं और हम अब यह मूल्यांकन करने के लिए अध्ययन शुरू कर रहे हैं कि वैक्सीन बुजुर्गों में प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को कितनी अच्छी तरह से प्रेरित करता है, और यह परीक्षण करने के लिए कि क्या यह व्यापक आबादी में सुरक्षा प्रदान कर सकता है”।

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