सेहत के लिए डॉक्‍टर से ज्‍यादा फायदेमंद होगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जानें कैसे

होने वाली बीमारी के बारे में पहले से बता देगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इसके सही तरह से उपयोग के लिए अब डॉक्टर्स को भी ट्रेनिंग दी जाएगी।

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Written By: Yogita Yadav | Published : January 22, 2019 3:05 PM IST

चिकित्सा के क्षेत्र में मशीनों के प्रयोग से बहुत सारे रोगों का इलाज आसान हुआ है। मशीनों के बाद अब 'मशीनी बुद्धि' यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी प्रयोग धीरे-धीरे चिकित्सा के क्षेत्र में बढ़ रहा है। हाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के प्रयोग से कैंसर और अल्जाइमर जैसे रोगों की शुरुआत में ही पहचान करना आसान हो गया है। जल्द ही चंढ़ीगढ़ पीजीआई में डॉक्टरों को इस बात की ट्रेनिंग दी जाएगी कि वो रोगों की पहचान करने में किस तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रयोग कर सकते हैं।

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क्या है आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस  कंप्यूटर और रोबोटिक्स की दुनिया में क्रांति जैसी है। यह किसी रोबोट को बुद्धि या समझ देने जैसा है। एआई युक्त रोबोट या यंत्र अपने आसपास के परिवेश के हिसाब से खुद फैसले करने में सक्षम होते हैं। बस ये समझ लीजिए कि इंसान की बुद्धि प्रकृति प्रदत्तस होती है जबकि रोबोट में इंसान बुद्धि डालता है। इस टर्म को कंप्यू टर साइंस एंड टेक्नो्लॉजी से जोड़ सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यह हॉलीवुड की उन फिल्मों जैसा है, जिसमें हीरो अपने रोबोट से बातें करता है और सलाह लेता है।

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बीमारी होने से पहले ही चल जाएगा पता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रेडियोलॉजी के क्षेत्र में काफी मदद मिलेगी। इस तकनीक के द्वारा किसी व्यक्ति में बीमारी की शुरुआत से पहले ही इसका पता लगा लिया जाएगा, जिससे व्यक्ति में उस रोग की संभावना को ही खत्म किया जा सके। स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में ये तकनीक बहुत जरूरी है।

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आपको बता दें कि विदेशों में मेडिकल केयर के क्षेत्र में इस तकनीक का इस्तेमाल आजकल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। लेकिन भारत में रेडियोलॉजिस्ट्स इस तकनीक के प्रयोग से घबराते हैं। यूके के एक रिसर्स सेंटर के प्रमुख रेडियोलॉजिस्ट प्रोफेसर संजय गांधी ने कहा कि, 'इस तकनीक के आने से चिकित्सकों की जरूरत नहीं खत्म होगी। ये तकनीक डॉक्टरों की मदद करेगी, जो डॉक्टरों को निर्णय लेने (इलाज के संबंध में) में मदद करेगी। पीजीआई में इस बात पर भी काम चल रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा ब्रेस्ट कैंसर का पता बिना किसी सर्जरी के लगाया जा सके।

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