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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : January 4, 2019 3:21 PM IST
कड़कनाथ चिकन के बारे में आप जानते हैं क्या ? कड़कनाथ चिकन के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। मध्यप्रदेश के झाबुआ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने भारतीय क्रिकेट टीम को कड़कनाथ चिकन खाने की सलाह दी है। जब से यह सलाद दी गयी है तब से यह चर्चा में है।
मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि टीम इंडिया को केवीके की बात पर विचार करना चाहिए। यादव ने कहा कि, "कड़कनाथ चिकन को लेकर केवीके की बात सुनी जानी चाहिए। अगर भारतीय क्रिकेट टीम को कड़कनाथ चिकन से पोषण संबंधी फायदा हो सकता है, तो केवीके के सुझाव पर विचार करने में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा है कि कड़कनाथ चिकन को बढ़ावा दिए जाने से झाबुआ में इस पारंपरिक प्रजाति के मुर्गे पालने वाले लोगों को भी फायदा होगा।
केवीके की ओर से 2 जनवरी को पत्र लिखकर कोहली के साथ बीसीसीआई को सलाह दी गई है कि भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के आहार में कड़कनाथ चिकन शामिल किया जाना चाहिए।
Krishi Vigyan Kendra, Jhabua (Madhya Pradesh) writes to BCCI and Indian captain Virat Kohli asking them to now consider eating 'Kadaknath' chicken due to its low cholesterol and fat content. pic.twitter.com/DH4GVNDGC5
— ANI (@ANI) January 2, 2019
सोशल मीडिया पर वायरल इस पत्र में कड़कनाथ चिकन की खूबियां गिनाते हुए कहा गया है कि इसमें दूसरी मुर्गा प्रजातियों के मांस के मुकाबले चर्बी और कोलेस्ट्रॉल काफी कम होता है, जबकि प्रोटीन और आयरन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है।
क्या खास है कड़कनाथ चिकन में ?
देश की जियोग्राफिकल इंडिकेशन्स रजिस्ट्री ने 'मांस उत्पाद और पोल्ट्री एवं पोल्ट्री मीट' की श्रेणी में गत 30 जुलाई को कड़कनाथ चिकन के नाम भौगोलिक पहचान (जीआई) का चिन्ह पंजीकृत किया था।
झाबुआ मूल के कड़कनाथ मुर्गे को स्थानीय जुबान में 'कालामासी' कहा जाता है। इसकी त्वचा और पंखों से लेकर मांस तक का रंग काला होता है।
जानकारों के मुताबिक कड़कनाथ चिकन की मांग इसलिए भी बढ़ती जा रही है, क्योंकि इसमें अलग स्वाद के साथ औषधीय गुण भी होते हैं। इन वजहों से कड़कनाथ प्रजाति के जीवित पक्षी, इसके अंडे और इसका मांस दूसरी कुक्कुट प्रजातियों के मुकाबले काफी महंगी दरों पर बिकता है।
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