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जब आप डायबिटिक से ग्रसित हैं तो ‘मुझे एक्सरसाइज़ करनी चाहिए या नहीं’ जैसे सवाल अक्सर हर किसी के मन में आते हैं और आपके पास ऐसा सोचने की ठीक वजह भी मौजूद है कि क्या एक्सरसाइज़ करना आपके लिए ठीक है या नहीं।
जानें डायबिटिक लोगों के लिए एक्सरसाइज़ बेहतर क्यों है ? नियमित एक्सरसाइज़ करने से आपका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य अच्छा रहता है, और डायबिटीज़ को नियंत्रण में रखने का भी यह अच्छा तरीक़ा है। ये भी पढ़ेंः टाइप 2 डायबिटीज और सफेद चावल का क्या सम्बंध है ?
जब आप व्यायाम करते हैं, तब आपका मोटापा कम होने लगता है, जिससे आपको इंसुलिन का प्रतिरोध कम करने में मदद मिलती है। इंसुनिन उत्पादन का यह बेहतर व नेचुरल तरीका है।
ग्लूकोज़ युक्त चीज़ें साथ रखें: छोटी कैंडी, ग्लूकोज़ की टैबलेट या स्पोर्ट्स ड्रिंक जैसे ग्लूकोज़ सप्लीमेंट्स जो तुरंत ग्लूकोज़ की कमी पूरी करते हों, अपने साथ रखें. ये सप्लीमेंट्स आपके शुगर लेवल को गिरने से बचाएंगे. ग्लूकोज़ युक्त चीज़ें आप वर्कआउट शुरू करने के पहले, बीच में और ख़त्म करने के बाद पिएं। ये भी पढ़ेंः टाइप 2 डायबिटीज से रहना है दूर तो डायट में शामिल करें ये 5 सुपर फूड।
एक्सरसाइज़ स्ट्रेस टेस्ट करें: अगर आप 40 साल से ज़्यादा उम्र के हैं, तो आप अपने डॉक्टर से एक्सरसाइज़ स्ट्रेस टेस्ट लेने के लिए कहें। इस टेस्ट में आपके डॉक्टर को जानकारी मिलती है कि एक्सरसाइज़ के तनाव में आपका हार्ट किस तरह काम करता है और वो कितना तनाव ले सकता है। इससे डॉक्टर को यह तय करने में मदद होती है कि आपका शरीर इन बदलावों को कितना संभाल सकेगा या ख़ून का दौरा शरीर के सभी हिस्सों में न होने पर क्या होगा, साथ ही आपका शरीर व्यायाम के लिए कितना तैयार है, कितना तंदरुस्त है।
कार्ब्स खाएं: आपमें एनर्जी बनी रहे इसके लिए आपके शरीर को एक्सरसाइज़ के पहले और बाद में कार्ब्स की ज़रूरत होती है. इसलिए एक्सरसाइज़ करने के एक या दो घंटे पहले और एक्सरसाइज़ करने के बाद में दो घंटे के भीतर कार्बोहाइड्रेट्स युक्त चीज़ें खाएं. जिससे आपके शरीर की शक्ति कम ना हो। आप हरी मूंग, मटर, सेब, कद्दू और शकरकंद (स्वीट पोटैटो) जैसी कार्ब्स वाली चीज़ें खा सकते हैं। ये भी पढ़ेंः टाइप 2 डायबिटीज से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकती है क्रैश डाइट।
मौसम का रखें ख्याल: बहुत ज़्यादा गर्म या ठंडे मौसम में एक्सरसाइज़ करना आपके ब्लड शुगर लेवल में उतार- चढ़ाव की वजह बन सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सामान्य मौसम में एक्सरसाइज़ करने के मुक़ाबले ज़्यादा गर्म या ठंडे मौसम में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए शरीर को ज़्यादा एनर्जी की ज़रुरत पड़ती है। ज़्यादा गर्म या ठंडे मौसम के हालात में बाहर एक्सरसाइज़ करने के बजाय घर के भीतर ही एक्सरसाइज़ करें। ये भी पढ़ेंः टाइप 2 डायबिटीज के लक्षण दिख जाते हैं 20 वर्ष पहले।
पानी की कमी ना होने दें: वैसे तो यह हम सभी के लिए ज़रुरी है, लेकिन अगर आपको मधुमेह यानी डायबिटीज़ है तो आप इस बात का ख़ास ख़याल रखें। एक्सरसाइज़ करने के दौरान शरीर से तरल पदार्थ के तौर पर पसीना निकलना कुदरती है, जिसका मतलब होता है आपके शरीर में पानी की कमी होने के आसार हैं और इसका असर आपके ब्लड शुगर लेवल पर पड़ सकता है। एक्सरसाइज़ शुरू करने के पहले, इसके दौरान और इसे ख़त्म करने के बाद भी पानी पिएं।
कितनी करें एक्सरसाइज : अगर आपको आँखों की बीमारी, पैरों की तकलीफ़, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटिक न्यूरोपैथी या ब्लड शुगर लेवल 250-300 से ज़्यादा होने जैसी कोई भी शिकायत है, तो आपके लिए यही बेहतर होगा कि आप मुश्किल क़िस्म के व्यायाम करने से बचें. वरज़िश को सहज लें और वॉकिंग, जॉगिंग, स्पॉट जॉगिंग, तैराकी के कुछ ग़ौते लगाने जैसी हल्क़ी फुल्की एक्सरसाइज़ ही करें। इससे आपका ब्लड शुगर का लेवल ज़्यादा कम होने से बचा रहेगा। ये भी पढ़ेंः हर दिन पिएं 3-4 कप कॉफी, टाइप-2 डायबिटीज का खतरा होगा कम।
अपने शरीर को ढलने का वक़्त दें : जब आप व्यायाम करना शुरू करते हैं, तो आपके शरीर को इस बदलाव को अपनाने में समय लगता है. इसलिए यह बहुत ज़रूरी है, कि एक्सरसाइज़ की रफ़्तार और उसका लेवल धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, जिससे आपका शरीर बेहतर तरीक़े से ढल सके. इस बात का भी ख़याल रखें कि आप अपने डॉक्टर से ये सलाह ज़रूर लें कि आपके लिए कौन सा विकल्प अच्छा रहेगा।
भारी गतिविधि करने के दौरान सावधान रहें: यह एक्सरसाइज़ की ऐसी क़िस्म है जहाँ आप वज़न उठाने से लेकर उसे पुश या पुल करते हैं. इस तरह की एक्सरसाइज़ को करने के दौरान आपको बार-बार अपनी सांसें रोकनी पड़ती है। ऐसे में अगर आपको रेटिनोपैथी है, तो यह आपके लिए ख़तरनाक हो सकता है.(3,4) इस तरह के व्यायाम करने के पहले अपने डॉक्टर के साथ ही आँखों के डॉक्टर से भी सलाह मशवरा कर लें।
अपने शरीर की सुनें: फ़िट रहने के लिए, अपने शरीर के इशारों को अनदेखा या अनुसना न करें। अगर आप किसी भी तरह का दर्द महसूस करें या असहज हो तो फ़ौरन व्यायाम रोक दें. थोड़ी देर का विराम लें, पानी पिएं और गहरी सांस लें।
व्यायाम से पहले और बाद में बेहतर ढंग से वॉर्म-अप और कूल-डाउन होना ज़रूरी है। यह शरीर को एक्सरसाइज़ करने के लिए तैयार होने और एक्सरसाइज़ के बाद शरीर को सामान्य होने में मदद करता है।