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Written By: Yogita Yadav | Published : August 10, 2018 3:54 PM IST
वैज्ञानिकों के प्रयोग द्वारा यह सिद्ध कर दिया गया है कि तकरार या बहस के दौरान पति-पत्नी नियंत्रण के बाहर हो जाते हैं। नतीजतन वे तरह-तरह की बीमारियों को न्योता देते हैं। एक शोध के अनुसार गृहस्थी में मामूली बहस भी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती है।
छोटी सी बात पर
अक्सर कुछ दंपति आदतन जरा-सी बात में बहस कर बैठते हैं, जो कि तकरार में बदलते देर नहीं लगती। इस तरह दोनों ही एक-दूसरे के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। हाल ही में हुए एक शोध में यह चौंकाने वाला तथ्य समाने आया है कि बहस के दौरान वे कोशिकाएं सबसे अधिक प्रभावित होती हैं, जो शरीर के रोगाणुओं से लड़ती हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों के अनुसार रक्त में मिली वे कोशिकाएं तेजी से हो रही बहस के दौरान उग्र रूप धारण करके प्रतिकूल असर दिखाने लगती हैं जिससे शरीर की सामान्य कोशिकाएं भी नष्ट होने लगती हैं। नतीजतन व्यक्ति की बीमारी उखड़ आती है और तीव्रता बढ़ जाती है।
हो सकती हैं ये बीमारियां
गृहस्थी में बहस करने से सांस, रक्तचाप, हृदय रोग ही नहीं, कैंसर जैसी बीमारी भी उग्र हो जाती है। कई अन्य शोधकर्ताओं का भी कहना है कि तकरार की स्थिति में शरीर के प्राकृतिक उद्दीपक असंतुलित हो जाते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक होते हैं। इन्हें मस्तिष्क द्वारा निर्देश मिलता है। उसी के अनुसार उनमें घट-बढ़ होती है, क्योंकि तकरार में मस्तिष्क से संतुलन टूटने लगता है। लिहाजा, उद्दीपक का संतुलन भी डगमगा जाता है।
न झगड़े शाम के समय
मानव शरीर में एड्रीनोलिन उद्दीपक की मात्रा सुबह के समय अपेक्षाकृत अधिक होती है। रात में नींद लाने वाला एडोरफिन सोने के लिए प्रेरित करता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि तकरार या डर के दौरान एड्रीनोलिन के स्राव के कारण शरीर में तीव्र एक्शन होता है। कुल मिलाकर इनकी मात्रा में कमी या बढ़ोतरी शरीर को प्रभावित करती है।
आत्महत्या के लिए बनते हैं प्रेरक
महिलाओं में तो यही स्थिति आत्महत्या तक के लिए प्रेरित करती है, वहीं पुरुषों में यह स्थिति मरने-मारने की नौबत ला देती है। रिपोर्ट में तकरार के कुछ रोचक तथ्यों को भी इंगित किया गया है। इसके अनुसार अक्सर पति-पत्नी में तकरार जरा-सी बात में शुरू होती है और धीरे-धीरे बढ़ती जाती है जिससे पुरुष के अहं को चोट लगती है, नतीजतन बात और बढ़ जाती है। इस तकरार के तर्क-वितर्क दोनों ही शरीर की आंतरिक क्रियाओं को प्रभावित करते हैं।
चित्रस्रोत: Shutterstock.