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Written By: Anshumala | Updated : November 24, 2018 2:23 PM IST
डायबिटीज से पीड़ित बच्चों की संख्या में हो रही है लगातार वृद्धि। © Shutterstock.
भारत में बच्चों में डायबिटीज के बढ़ते मामलों के मद्देनजर अपोलो सेंटर फाॅर ओबेसिटी, डायबिटीज एंड एंडोक्राइनोलॉजी ने डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और उनके माता-पिता के लिए नई दिल्ली के जसोला स्पोर्ट्स काॅम्प्लेक्स में एक जागरूकता शिविर का आयोजन किया। सत्र के दौरान बच्चों के लिए रोचक खेलों और गतिविधियों का आयोजन भी किया गया। लगभग 100 लोगों ने कैम्प में हिस्सा लिया, जहां डाॅ. एस के वांगनू, सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स) एवं उनकी टीम ने लोगों को डायबिटीज के बारे में जानकारी दी, उनके सवालों के जवाब दिए।
कैसे करें बच्चे डायबिटीज का प्रबंधन
विश्व मधुमेह दिवस के मद्देनजर इस पहल का आयोजन किया गया। इस मौके पर बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज, इसेे नियंत्रित रखने के प्रभावी तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के माता-पिता को बताया गया कि कैसे उनके बच्चे सेहतमंद जीवन जी सकते हैं। बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए नेल आर्ट, जोकर, बाउंसी, मैजिशियन, टग आॅफ वार जैसी गतिविधियां भी आयोजित की गईं। उन्हें खेल-खेल में बताया गया कि कैसे वे डायबिटीज का प्रबंधन कर सकते हैं।
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डायबिटीज अवेयरनेंस कैंप में बच्चों के साथ डॉ. एस.के. वांगनू।
तेजी से बढ़ रहे हैं डायबिटीज के मामले
इस मौके पर डाॅ. एस के वांगनू ने कहा, ‘‘भारत डायबिटीज की दृष्टि से दुनिया की राजधानी बन चुका है। देश में डायबिटीज केे मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इस बीमारी के मुख्य कारण हैं गतिहीन जीवनशैली और बहुत ज्यादा कैलोरी से युक्त भोजन का सेवन। आजकल, पारंपरिक आहार की जगह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन, चीनी युक्त पेय पदार्थों और प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट ने ले ली है। इन खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व नहीं होते हैं। इसके अलावा, आजकल बच्चे बाहर खेलने या व्यायाम में बहुत कम समय बिताते हैं और घर पर ही मोबाइल गेम, टैब और टीवी स्क्रीन पर समय बिताना पसंद करते हैं। यही कारण है कि आज अधिकतर बच्चों का वजन सामान्य से अधिक है, जिसके चलते इन बच्चों में डायबिटीज की संभावना बढ़ जाती है।
आउटडोर गतिविधियों को दें बढ़ावा
आउटडोर एवं अन्य मनोरंजक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा सेहतमंद आहार के बारे जागरूकता बनाने के लिए विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया। डायबिटीज से पीड़ित बच्चों के माता-पिता को बताया गया कि कैसे वे रोग का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं।
क्या होता है डायबिटीज होने पर
डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन का स्तर सामान्य नहीं रह पाता। इसका असर शरीर के विभिन्न कार्यों पर पड़ता है। इससे टिश्यू को नुकसान पहुंच सकता है। इलाज न करने पर आॅर्गन फेलियर तक हो सकता है। जीवनशैली से जुड़ी इस बीमारी के 49 फीसदी मरीेज भारत में हैं। 2017 में इसके 72 मिलियन मामले दर्ज किए गए। एक अनुमान के अनुसार, 2025 तक यह संख्या दोगुनी होकर 134 मिलियन तक पहुंच जाएगी। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाकर डायबिटीज की रोकथाम की जा सकती है और इसका बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है।
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