एंटीऑक्सीडेंट्स रिच डायट से हो सकता है बाउल कैंसर, एक्सपर्ट्स ने किया दावा

एक स्टडी में कहा गया है कि एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत माने जाते वाले खाद्य, जैसे कोको, ब्लैक टी और ब्लूबेरीज़ के ज़्यादा सेवन से कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का ख़तरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 2, 2020 7:39 PM IST

Antioxidants Side Effects:  एंटीऑक्सीडेंट्स को हेल्दी ब़ॉडी और खासकर अच्छी रोग प्रतिरोधक शक्ति के लिहाज से फायदेमंद माना जाता है। इसीलिए, एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फूड्स खाने की सलाह इन दिनों कोरोना वायरस महामारी से बचने के लिए भी दी जा रही है। दरअसल, एंटीऑक्सीडेंट्स ऐसे कम्पाउंड्स हैं जो शरीर को फ्री-रैडिकल्स के नुकसान से बचाते हैं। जिससे, कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों सहित कई छोटी-मोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स और इंफेक्शन्स आदि से बचाव होता है। (Antioxidants Side Effects in Hindi)

यही नहीं एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की कार्यप्रणालियों को सही तरीके से काम करने में सहायता करते हैं। इनसे,  वजन भी नियंत्रित रहता है। जिससे, आप मोटापे और अन्य लाइफस्टाइल डिज़िज़ेज़ से बच पाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट्स को हमेशा शरीर के लिए अच्छा माना जाता रहा है। लेकिन,  अगर एंटीऑक्सीडेंट्स की बहुत अधिक मात्रा शरीर को मिलती है तो उससे भी कई प्रकार के  नुकसान हो सकते हैं। जी हां, एक हालिया स्टडी में यह दावा किया गया है कि एंटीऑक्सीडेंट्स की अधिक मात्रा शरीर के लिए नुकसानदायक है।

क्या एंटीऑक्सीडेंट्स से हो सकता है बाउल कैंसर ?:

हिब्रू यूनिवर्सिटी द्वारा की गयी इस स्टडी में कहा गया कि एंटीऑक्सीडेंट्स का अच्छा स्रोत माने जाते वाले खाद्य, जैसे कोको, ब्लैक टी और ब्लूबेरीज़ के ज़्यादा सेवन से कुछ विशेष प्रकार के कैंसर का ख़तरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं की टीम ने इस रिसर्च पेपर में कहा है कि कैंसर म्यूटेशन हमेशा ख़राब नही माने जा सकते। कुछ विशेष माइक्रो-एनवॉरमेंट जैसे, हमारा गट में कैंसर म्यूटेशन से कैंसर रोकने में मदद होती है। लेकिन, जब एंटीऑक्सीडेंट्स की अधिक मात्रा गट तक पहुंचती है तो, जीन म्यूटेशन की प्रक्रिया बढ़ जाती है। जो, कि बाउल में कैंसर होने का ख़तरा बढ़ाता है।

इस रिसर्च मे पाया गया कि  गैस्ट्रोइंस्टेटाइनल कैंसर के केवल 2 प्रतिशत मामलों की शुरुआत इंस्टेटाइन में होती है। जबकि,  98 फीसदी कैंसर कोलोन या गट बैक्टेरिया की वजह से होता है।  ऐसा इसलिए होता है क्योंकि, छोटी आंत में गट बैक्टेरिया बहुत कम मात्रा में रहते हैं। जबकि, कोलोन में इनकी संख्या बहुत अधिक होती है।

इस रिसर्च में बताया गया कि टीपी53 (TP53) नामक एक जीन जो, सेल्स में पाया जाता है। वह, पी53 नामक एक प्रोटीन का उत्पादन करता है। यह प्रोटीन सेल्स में जेनेटिक म्यूटेशन की प्रक्रिया को बाधित करता है। लेकिन, जब यह प्रोटीन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या किसी प्रकार से इसे नुकसान होता है। तो, यह सुरक्षा परत भी प्रभावित होती है और इस तरह यह कैंसर को फैलने से रोक नहीं पाती।

कितना एंटीऑक्सीडेंट्स लेना है सही?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस स्टडी के परिणामों को नज़रअंदाज़ करना ठीक नहीं। लेकिन, यह भी सच है कि शरीर को एंटीऑक्सीडेंट्स की आवश्यकता पड़ती है। इस स्टडी में यह कहा गया है कि जिन लोगों को कोलोरेक्टर कैंसर का ख़तरा अधिक है, उन्हें एंटीऑक्सीडेंट्स के सेवन के नुकसान होने का ख़तरा भी ज़्यादा है। ऐसे में एक्सपर्ट्स सलाद देते हैं कि, चूंकि, शरीर को पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स उपलब्ध कराने के लिए आप अपने डायटिशन से बात करें और सही फलों, सब्ज़ियों आदि का चयन और सेवन उसी हिसाब से करें। (Antioxidants benefits)

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