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Written By: Pallavi Kumari | Updated : June 11, 2022 12:38 PM IST
कोरोना वायरस महामारी ने सिर्फ इंसानों को ही परेशान नहीं किया है बल्कि जानवरों को भी अपना शिकार बनाया है। ऐसी में भारत ने जानवरों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए एक बड़ा काम किया है। हरियाणा स्थित आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स (एनआरसी) ने जानवरों को बचाने के लिए पहले कोरोना वैक्सीन (Covid vaccine for animals) विकसित किया है। इसका नाम एनोकोवैक्स (Anocovax) है। कल केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जानवरों के लिए विकसित किए गए देश के इस पहले कोविड रोधी टीके ‘एनोकोवैक्स’ को लॉच किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों के अथक योगदान की सराहना की और कहा देश आयात करने के बजाय अपने स्वयं के टीकों को विकसित करने में आत्मनिर्भर है। यह वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो केंद्रीय मंत्री ने इक्वाइन डीएनए पेरेंटेज टेस्टिंग किट भी लांच की है, जो घोड़ों के बीच पेरेंटेज विशेलेषण के लिए एक शक्तिशाली जीनोटिक एप्लीकेशन है।
Anocovax हिसार, हरियाणा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स (NRCE) द्वारा उत्पादित किया जा रहा है। एनोकोवाक्स एक निष्क्रिय सार्स-सीओवी-2 डेल्टा टीका है। जिसका अर्थ है कि यह एक सहायक अलहाइड्रोजेल के साथ डेल्टा संस्करण के एंटीजन का उपयोग करता है। टीका डेल्टा एंटीजन का उपयोग करता है, और इसलिए मुख्य रूप से एक टीका है कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ काम कर सकता है।
आईसीएआर की मानें तो ये टीका कई जानवरों के लिएकाम करता है। जैसे कि ये वैक्सीन कुत्तों, शेरों, तेंदुओं, चूहों और खरगोशों में उपयोग के लिए सुरक्षित है।
एनोकोवैक्स जानवरों में कोविड-19 के डेल्टा और ओमीक्रोन दोनों स्वरूपों को बेअसर करती है।
बता दें कि यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की मानें तो, मनुष्यों को संक्रमित करने वाला कोरोनावायरस, संक्रमित मनुष्यों के निकट संपर्क में आने वाले जानवरों को संक्रमित कर सकता है। हालांकि, अभी भी संपर्क के जरिए जानवरों से मनुष्यों में SARS-CoV-2 के ट्रांसमिशन का कोई सबूत नहीं है।
गौरतलब है कि भारत से पहले, रूस जानवरों के लिए कोरोना का टीका बना चुका है। अप्रैल 2021 में, रूस ने घोषणा की कि उसने जानवरों के लिए दुनिया का पहला COVID वैक्सीन रेजिस्टर करवाया था, जिसे Carnivac-Cov कहा जाता है। बाद में अमेरिका में भीकई जानवरों, विशेष रूप से चिड़ियाघरों में, फाइजर की सहायक दवा कंपनी ज़ोएटिस द्वारा निर्मित एक प्रायोगिक कोविड वैक्सीन जानवरों को दी गई थी। अब देखना यह होगा कि जानवरों के लिए अपना भारतीय वैक्सीन कितना कारगर है।