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कोविड वैक्सीनेशन को लेकर शुरू से ही लोगों के मन में असमंजस की स्थिति रही है कि कहीं कोई इसका साइड-इफेक्ट तो नहीं। अब, जब बच्चों को भी वैक्सीन दी जाने लगी है तो लोगों के मन में इसको लेकर होने वाली एलर्जी का डर भी सताने लगा है। लेकिन अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अब वैक्सीन से होने वाले एलर्जिक रिएक्शन का पता लगाने की कवायद शुरू कर दी है। आइए जानते हैं आखिर क्या कहते हैं शोधकर्ता।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) द्वारा ये घोषणा की गई है कि अमेरिकी शोधकर्ता कोविड-19 की एमआरएनए वैक्सीन से होने वाले दुर्लभ लेकिन संभावित गंभीर एलर्जिक रिएक्शन को समझने में मदद करने के लिए एक टेस्ट कर रहे हैं, जिससे ये साफ हो सकेगा कि वाकई में इस वैक्सीन से कोई दिक्कत है या नहीं है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इस एक बार में होने वाले टेस्ट को 16 से 69 वर्ष की उम्र के 100 लोगों पर किया जाएगा, जिन्हें कोविड-19 एमआरएनए वैक्सीन की पहली डोज से एलर्जी हुई थी। इन लोगों के शरीर पर वैक्सीन लगने के बाद एलर्जिक रिएक्शन देखे गए थे।
अध्ययन में शामिल इन सभी लोगों को मैरीलैंड के बेथेस्डा में एनआईएच के क्लीनिकल सेंटर में सावधानीपूर्वक और कंट्रोल परिस्थितियों में वैक्सीन की दूसरी डोज दी जाएगी और ये देखा जाएगा कि इनके शरीर पर कितने दिनों में एलर्जिक रिएक्शनसामने आता है।
एनआईएच के अनुसार, नामांकन से पहले, उसके समय और टीकाकरण के बाद के महीनों में मानसिक स्वास्थ्य प्रश्नावली को भी पूरा किया जाएगा।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के निदेशक एंथनी फौसी ने कहा, "जिन लोगों ने कोविड-19 एमआरएनए की डोज ली थी उन्हें वैक्सीन लगवाने के बाद एलर्जिक रिएक्शन महसूस हुए थे, उन्हें वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने में थोड़ा संकोच हो सकता है।"
उन्होंने कहा, "यह अध्ययन हमें यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि जिन व्यक्तियों को एलर्जी जैसी प्रतिक्रियाओं का अनुभव हुआ है, वे सुरक्षित रूप से कोविड-19 एमआरएनए वैक्सीन की दूसरी डोज प्राप्त कर सकते हैं।"
(सोर्स-आईएएनएस)